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प्रधानमंत्री मोदी का दशकों पुराना जापान कनेक्शन, जिसने भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी की रखी मजबूत नींव

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का भारत दौरा दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती देगा. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जापान के साथ यह रिश्ता 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नहीं, बल्कि कई दशक पहले शुरू हो चुका था.

PM Modi

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और जापान के रिश्ते लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं. दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जापान सिर्फ एक अहम साझेदार देश नहीं है. इस देश से उनका जुड़ाव कई दशक पुराना है, जिसकी शुरुआत राजनीति की ऊंचाइयों तक पहुंचने से बहुत पहले हो चुकी थी.

बताया जाता है कि 1980 के शुरुआती वर्षों में, जब नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के युवा प्रचारक थे, तब नेपाल यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात जापान के नागोया शहर के एक युवक से हुई. यही मुलाकात आगे चलकर लंबी दोस्ती में बदल गई. दोनों के बीच वर्षों तक पत्रों के जरिए संपर्क बना रहा. उनके जापानी मित्र समय-समय पर उन्हें जापान के मशहूर ब्रांडों के जूते और टी-शर्ट जैसे उपहार भेजते थे. जवाब में मोदी ने उन्हें श्रीमद्भगवद्गीता की एक प्रति भेंट की. यह रिश्ता केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि दोनों देशों की संस्कृति को समझने और साझा करने का माध्यम भी बना.

गुजरात के मुख्यमंत्री रहते जापान से बढ़ा जुड़ाव

साल 2007 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी पहली बार आधिकारिक यात्रा पर जापान पहुंचे. इस दौरे को उन्होंने सिर्फ औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रखा. करीब 40 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ उन्होंने टोक्यो, ओसाका, हिरोशिमा और कोबे जैसे शहरों का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने जापान की कार्य संस्कृति, तकनीकी प्रगति और औद्योगिक व्यवस्था को करीब से समझने की कोशिश की.

यात्रा के दौरान उन्होंने मित्सुबिशी, मित्सुई, सुमितोमो, मारुबेनी, सुजुकी, तोशिबा, निप्पॉन स्टील और निसान स्टील जैसी बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. इसी यात्रा में जापानी निवेश संस्था जेट्रो और गुजरात सरकार के बीच महत्वपूर्ण समझौते भी हुए, जिससे भविष्य में निवेश के नए रास्ते खुले.

शिंजो आबे से पहली मुलाकात बनी ऐतिहासिक

इसी जापान यात्रा के दौरान नरेंद्र मोदी की मुलाकात उस समय के उभरते नेता शिंजो आबे से हुई. यह मुलाकात आगे चलकर दोनों नेताओं के बीच गहरी व्यक्तिगत मित्रता का आधार बनी. कहा जाता है कि पहली ही मुलाकात में दोनों के बीच भरोसे और सम्मान का रिश्ता कायम हो गया था. बाद के वर्षों में जब शिंजो आबे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे, तब भी प्रधानमंत्री मोदी लगातार उनका हालचाल लेते रहे.

बुलेट ट्रेन में सफर और भारत के लिए नया सपना

जापान दौरे का सबसे खास अनुभव शिंकानसेन बुलेट ट्रेन की यात्रा रहा. इसी सफर के दौरान नरेंद्र मोदी के मन में भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क विकसित करने का विचार और मजबूत हुआ. उन्हें ट्रेन के चालक कक्ष में जाने का दुर्लभ अवसर भी मिला, जहां उन्होंने इंजीनियरों से भूकंप सुरक्षा, समय प्रबंधन और आधुनिक तकनीक से जुड़े कई पहलुओं को विस्तार से समझा. बाद में यही अनुभव भारत की हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं की सोच का अहम हिस्सा बने.

दिलचस्प बात यह भी रही कि भाषा अलग होने के बावजूद उन्होंने ट्रेन में सफर कर रहे जापानी बच्चों से बातचीत की और यात्रा का काफी समय उनके साथ बिताया.

जापान से सीखी व्यवस्थाओं को भारत में लागू करने की सोच

टोक्यो के प्रसिद्ध सेंसोजी मंदिर की यात्रा के दौरान मोदी ने वहां की भीड़ प्रबंधन व्यवस्था, साफ-सफाई, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और शहरी नियोजन का बारीकी से अध्ययन किया. उनका उद्देश्य यह समझना था कि भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी ऐसी व्यवस्थाएं किस तरह अपनाई जा सकती हैं.

कच्छ भूकंप के बाद पुनर्वास कार्यों में भी उन्होंने जापान के कोबे शहर के भूकंप-रोधी निर्माण मॉडल से प्रेरणा ली. वहीं, गुजरात में बच्चों के कुपोषण से निपटने की योजनाओं के दौरान अधिकारियों को जापान की मिड-डे मील व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए भी प्रोत्साहित किया.

लोकतांत्रिक मूल्यों पर दिया था खास संदेश

जापान के एक विश्वविद्यालय में जब उनसे पूछा गया कि भारत और जापान चीन के बढ़ते प्रभाव का सामना कैसे करें, तो उन्होंने एक अलग नजरिया पेश किया. उन्होंने कहा था कि अंधकार को तलवार से नहीं, बल्कि एक छोटा-सा दीपक भी दूर कर सकता है. उनका संदेश था कि भारत और जापान साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर दुनिया में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं.

साल 2012 में नरेंद्र मोदी दोबारा जापान पहुंचे. उस समय भारत-जापान राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर उन्हें जापान सरकार ने विशेष रूप से आमंत्रित किया. पांच दिनों की यात्रा में उन्होंने पांच शहरों में 40 से अधिक कार्यक्रमों में भाग लिया. व्यस्त कार्यक्रम और नवरात्रि के व्रत के बावजूद उन्होंने निवेशकों और उद्योगपतियों से लंबी चर्चाएं कीं.

सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के प्रमुख ओसामु सुजुकी के आमंत्रण पर उन्होंने पारंपरिक जापानी संस्कृति का अनुभव किया. इसके बाद उन्होंने अचानक कंपनी के विनिर्माण संयंत्र का दौरा करने की इच्छा जताई और करीब तीन घंटे तक ऑटोमोबाइल निर्माण की पूरी प्रक्रिया को ध्यान से देखा. वहां काम कर रहे भारतीय इंजीनियरों से भी उन्होंने विस्तार से बातचीत की.

प्रधानमंत्री बनने के बाद दिखा शुरुआती अनुभवों का असर

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी के जापान से वर्षों पुराने अनुभव दोनों देशों की साझेदारी को नई दिशा देने में काम आए. मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना, दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, रक्षा सहयोग, सप्लाई चेन रेजिलिएंस और तकनीकी साझेदारी जैसे कई बड़े क्षेत्रों में भारत और जापान के संबंध लगातार मजबूत हुए. कहा जा सकता है कि इन परियोजनाओं की नींव उन शुरुआती अनुभवों और भरोसे पर टिकी थी, जो नरेंद्र मोदी ने दशकों पहले जापान के साथ अपने व्यक्तिगत और पेशेवर जुड़ाव के दौरान तैयार किए थे.

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भारत एक्सप्रेस



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