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टू-फ्रंट वॉर का वो चक्रव्यूह जिसे भेदने की तैयारी में है भारत: क्या है थिएटर कमांड, जिससे कांपेंगे चीन और पाकिस्तान?

सीडीएस जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि जल्द थिएटर कमांड का अंतिम ब्लूप्रिंट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंप सकते हैं. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत थल सेना, नौसेना और वायुसेना को एकीकृत कर आधुनिक युद्ध के लिए संयुक्त कमांड संरचना तैयार की जाएगी.

भारतीय रक्षा इतिहास में आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा और सबसे आक्रामक सैन्य री-बूट (Indian army Theatre Command) अब ज़मीन पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन एस राजा सुब्रमणि की कमान में भारतीय सेनाओं के एकीकरण का वो चक्रव्यूह अंतिम दौर में पहुंच चुका है, जिसकी फाइलें पिछले दो दशकों से दिल्ली के गलियारों में धूल फांक रही थीं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए सीडीएस जल्द ही थिएटर कमांड का फाइनल ब्लूप्रिंट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपने जा रहे हैं.

यह सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है बल्कि बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में चीन और पाकिस्तान की संयुक्त चुनौती यानी टू-फ्रंट वॉर से एक साथ निपटने के लिए तैयार किया गया भारत का ब्रह्मास्त्र है. सरकार की हरी झंडी मिलते ही थल सेना, नौसेना और वायुसेना तीन अलग-अलग टुकड़ियों की तरह नहीं, बल्कि एक संयुक्त ‘महा-मुक्के’ की तरह दुश्मन की छाती पर प्रहार करेंगी.

जानिए थिएटर कमांड क्या है?(Indian army Theatre Command)

आसान भाषा में समझें तो थिएटर कमांड का मतलब सेना की तीनों शाखाओं को एक ही छत के नीचे लाकर एक संयुक्त लड़ाकू मशीन में तब्दील करना है. साल 1999 में कारगिल की बर्फीली चोटियों पर जब पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कब्ज़ा किया, तब भारतीय थल सेना ने मोर्चा तो संभाल लिया, लेकिन उस दुर्गम इलाके में वायुसेना के लड़ाकू विमानों की तुरंत आवश्यकता थी. उस दौर में थल सेना और वायुसेना के अलग-अलग कमांड सेंटर्स होने और दिल्ली से क्लीयरेंस मिलने में जो कीमती वक्त बर्बाद हुआ, उसने भारत को एक बड़ा रणनीतिक सबक दिया.

हालांकि भारत ने वो जंग अपने जांबाजों के शौर्य से जीत ली, लेकिन तभी रक्षा विशेषज्ञों ने साफ कह दिया था कि भविष्य की जंगें अलग-अलग रहकर नहीं, बल्कि एक साथ मिलकर ही जीती जा सकती हैं. इसी ऐतिहासिक सबक के बाद आज 27 साल लंबे इंतजार के बाद थिएटर कमांड को अमलीजामा पहनाया जा रहा है, जहां दुश्मन के खिलाफ पूरी मिलिट्री पावर को एक ही कमांडर हैंडल करेगा.

अभी कैसे काम करती हैं हमारी तीनों सेनाएं?

वर्तमान व्यवस्था की बात करें तो भारत की तीनों सेनाएं आज भी पुराने और बिखरे हुए ढांचे के तहत काम कर रही हैं. इस समय देश में तीनों सेनाओं के कुल मिलाकर 17 अलग-अलग ऑपरेशनल कमांड सक्रिय हैं. इनमें थल सेना के पास सात, वायुसेना के पास सात और नौसेना के पास तीन स्वतंत्र कमांड शामिल हैं. हर सेना की अपनी अलग कमान, अलग रणनीति और अलग भौगोलिक जिम्मेदारियां बंटी हुई हैं.

इस बिखरे (Indian army Theatre Command) हुए स्वरूप की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि किसी अचानक छिड़ने वाले युद्ध या संयुक्त सैन्य ऑपरेशन के दौरान इन 17 कमांड्स के बीच तालमेल बिठाने, लॉजिस्टिक्स शेयर करने और त्वरित निर्णय लेने में बहुत अधिक समय लग जाता है, जो आधुनिक दौर की पलक झपकते बदलने वाली जंग में बेहद घातक साबित हो सकता है.

क्या हैं भारत के संभावित थिएटर कमांड्स?

नए प्रस्ताव के अनुसार, इन 17 बिखरे हुए कमांड्स को समेटकर केवल तीन बड़े और शक्तिशाली एकीकृत थिएटर कमांड्स में बदलने की तैयारी है. पहला होगा नॉर्दर्न थिएटर कमांड, जिसका मुख्यालय लखनऊ में हो सकता है और यह पूरी तरह से चीन सीमा की चौकसी और चीनी सेना के किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए समर्पित होगा. दूसरा होगा वेस्टर्न थिएटर कमांड, जिसका मुख्यालय जयपुर में बनाए जाने की चर्चा है और इसका एकमात्र फोकस पाकिस्तान सीमा को पूरी तरह से सील और सुरक्षित रखना होगा.

तीसरा होगा मैरीटाइम थिएटर कमांड, जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा करेगा और चीनी नौसेना के बढ़ते दखल को कुचलेगा. इसके अलावा पूरे देश के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक समर्पित एयर डिफेंस कमांड और सेना की रसद आपूर्ति के लिए एक एकीकृत लॉजिस्टिक्स कमांड भी बनाया जा रहा है.

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क्या है इसका जियोपॉलिटिकल असर?

भारत के इस सैन्य आधुनिकीकरण (Indian army Theatre Command) को देखकर बीजिंग से लेकर रावलपिंडी तक के रक्षा मंत्रालयों में हड़कंप मचा हुआ है. चीन ने बहुत पहले ही अपनी पूरी सेना को पांच वेस्टर्न थिएटर कमांड्स में बांटकर आधुनिक युद्ध की तैयारी कर ली थी, और वह इसी बिखरे हुए ऊंट का फायदा उठाकर भारत पर दबाव बनाना चाहता था. लेकिन अब भारत का यह नया सैन्य त्रिशूल बीजिंग की इस कूटनीति को ध्वस्त कर देगा.

बताते चलें टू-फ्रंट वॉर के हालात में अब भारत को तीन अलग-अलग सेनाओं से समन्वय नहीं करना होगा बल्कि वेस्टर्न और नॉर्दर्न थिएटर कमांड्स स्वायत्त रूप से एक साथ चीन और पाकिस्तान को घुटनों पर लाने की क्षमता रखेंगे. हिंद महासागर में मैरीटाइम कमांड के एक्टिव होते ही चीन की मलक्का जलडमरूमध्य वाली दुखती रग पूरी तरह भारत के शिकंजे में आ जाएगी, जिससे वैश्विक पटल पर भारत की सैन्य धमक कई गुना बढ़ जाएगी.

-भारत एक्सप्रेस



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