India Tourism Development: भारत में टूरिज्म सेक्टर ने पिछले दशक में सबसे संगठित और सरकार-प्रेरित विकास देखा है. पहले की तुलना में अब तीन बड़ी राष्ट्रीय योजनाओं PRASHAD, Swadesh Darshan और Swadesh Darshan 2.0 को जोड़कर काम किया जा रहा है. इन योजनाओं के तहत कुल ₹9,225 करोड़ से ज्यादा का निवेश हुआ है, जो 183 प्रोजेक्ट्स में फैला है.
धार्मिक स्थलों का कायाकल्प
2015 में शुरू हुई PRASHAD योजना का मकसद धार्मिक स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना लेकिन उनकी आध्यात्मिक पहचान को बनाए रखना था. 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 54 प्रोजेक्ट्स मंजूर हुए, जिनमें से 32 पूरे हो चुके हैं. इसमें आगंतुक प्लाज़ा, पार्किंग, वेटिंग हॉल, क्लोक रूम जैसी सुविधाएं शामिल हैं. स्वच्छता, बायो टॉयलेट्स, ड्रेनेज और व्हीलचेयर जैसी सुविधाएँ इसे समावेशी बनाती हैं. आंध्र प्रदेश, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बड़े धार्मिक स्थलों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए. IIM रोहतक की 2021 की स्टडी ने दिखाया कि इन प्रोजेक्ट्स से विज़िटर संतुष्टि और अनुभव में बड़ा सुधार हुआ है.
थीमैटिक सर्किट्स: Swadesh Darshan
- PRASHAD ने जहां धार्मिक स्थलों पर ध्यान दिया, वहीं Swadesh Darshan ने पहली बार थीमैटिक सर्किट्स का मॉडल अपनाया.
- 76 प्रोजेक्ट्स मंज़ूर हुए, जिनमें से 75 पूरे हो चुके हैं.
- इसमें Coastal, Heritage, Spiritual, Eco, Buddhist, Himalayan और Tribal सर्किट्स बनाए गए.
- उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल और मणिपुर में धार्मिक स्थलों को अपग्रेड किया गया.
- गुजरात, राजस्थान और पुडुचेरी में सांस्कृतिक धरोहरों पर निवेश हुआ, जबकि मध्य प्रदेश और मिज़ोरम में इको-फ्रेंडली टूरिज़्म को बढ़ावा मिला.
- उत्तर-पूर्व भारत को भी खास प्राथमिकता दी गई, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पर्यटन को बल मिला.
डेस्टिनेशन आधारित विकास: Swadesh Darshan 2.0
सर्किट मॉडल के बाद अब SD 2.0 आया है, जो डेस्टिनेशन-केंद्रित है. इसमें 53 प्रोजेक्ट्स मंज़ूर हुए हैं, जिनकी लागत ₹2,208 करोड़ है. आंध्र प्रदेश में Suryalanka Beach और Borra Caves, बिहार में बोधगया, छत्तीसगढ़ में भोरमदेव कॉरिडोर, केरल में Alappuzha Water Wonderland और राजस्थान में खाटू श्याम जी मंदिर जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं. यह मॉडल अनुभव-आधारित है, जिसमें स्थानीय संस्कृति, स्थिरता और समुदाय की भागीदारी पर जोर है.
स्किल डेवलपमेंट और रोजगार
सरकार ने सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि मानव संसाधन पर भी ध्यान दिया है. युवाओं और महिलाओं को ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन दिया जा रहा है. इससे ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं. टूरिज़्म सर्विस प्रोवाइडर्स को प्रोफेशनल बनाने से विज़िटर अनुभव और बेहतर हुआ है.
संतुलित निवेश और राष्ट्रीय रणनीति
उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में धार्मिक, सांस्कृतिक और अनुभव आधारित प्रोजेक्ट्स का संतुलित निवेश हुआ है. यूपी में वाराणसी, वृंदावन, गवर्धन और प्रयागराज में बड़े प्रोजेक्ट्स हुए. आंध्र प्रदेश में अमरावती, श्रीशैलम और अराकू जैसे स्थानों पर विकास हुआ.
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आज भारत का टूरिज़्म सेक्टर योजनाबद्ध निवेश, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुभव-आधारित मॉडल पर खड़ा है. ₹9,225 करोड़ से ज्यादा की लागत वाले 183 प्रोजेक्ट्स ने टूरिज़्म को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है. यह न सिर्फ विज़िटर अनुभव को बेहतर बना रहा है बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण, स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बढ़ावा दे रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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