भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर एक खबर आ रही है. लंबे समय से जिस ट्रेड डील का इंतजार किया जा रहा था, उसे लेकर अब तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया हैं कि अगले 4 से 5 दिनों के भीतर दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के बयानों (Trade Deal Statements) पर मुहर लग सकती है.
इस डील का पहला कानूनी ड्राफ्ट यानी ‘लीगल ड्राफ्ट’ मार्च के मध्य तक सामने आने की उम्मीद है.
आम आदमी और छोटे कारोबारियों को क्या मिलेगा?
पीयूष गोयल ने इस पर स्पष्ट कहा कि यह समझौता हमारे MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग), कुशल कारीगरों और नए उद्यमियों के लिए अवसरों का पिटारा खोलने वाला है. सरकार ने हमारे किसानों और डेयरी सेक्टर के हितों से कोई समझौता नहीं किया है. मंत्री ने संसद में साफ किया कि खेती-किसानी और डेयरी क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है, ताकि विदेशी बाजार की वजह से हमारे ग्रामीण आर्थिक ढांचे पर कोई बुरा असर न पड़े.
ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का स्टैंड
एक अहम मुद्दा एनर्जी यानी तेल और गैस का भी है. गोयल ने कहा कि भारत के लिए अपने 140 करोड़ नागरिकों की ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ सबसे ऊपर है. हम अपनी घरेलू जरूरतों और जनता की जेब को ध्यान में रखकर ही फैसले लेंगे.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस डील को लेकर उत्साह दिखाया था. उन्होंने बताया कि भारत ने व्यापारिक बाधाओं को कम किया है और रूस से तेल की खरीद को लेकर अपना रुख बदला है (अब भारत वेनेजुएला जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है). इसी का नतीजा है कि अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया है. इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिलेगी.
विकसित भारत 2047 की ओर एक कदम
यह सिर्फ व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक बड़ी छलांग है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले साल की अमेरिकी यात्रा के बाद से ही इस पर मंथन चल रहा था. पीयूष गोयल का मानना है कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं. यानी जो हमारे पास है उसकी उन्हें जरूरत है, और जो उनके पास है उससे हमारा विकास तेज होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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