India US Trade Deal
India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में इस सप्ताह अहम बातचीत होने जा रही है. दोनों देशों के मुख्य वार्ताकार 1 जून से नई दिल्ली में चार दिनों तक बैठक करेंगे, जहां समझौते के विभिन्न प्रावधानों और कानूनी मसौदे पर विस्तृत चर्चा की जाएगी.
इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य उस अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे को अंतिम रूप देना है, जिस पर दोनों पक्ष इस वर्ष की शुरुआत में सहमत हुए थे. बैठक के दौरान समझौते से जुड़े तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच करेंगे, जबकि भारतीय पक्ष का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे.
इन मुद्दों पर होगी चर्चा
इसके अलावा, दोनों देश व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तहत बाजार पहुंच, नॉन टैरिफ बैरियर्स, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने, निवेश को बढ़ावा देने और आर्थिक सुरक्षा सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा को आगे बढ़ाएंगे.
दोनों देशों द्वारा 7 फरवरी को जारी संयुक्त बयान के बाद वार्ता शुरू हुई, जिसमें व्यापार व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने और रूस से तेल की खरीद से संबंधित कुछ भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को हटाने पर सहमति व्यक्त की थी.
व्यापारिक माहौल में आया बदलाव
हालांकि, तब से व्यापारिक माहौल में काफी बदलाव आया है. 20 फरवरी को, अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पारस्परिक शुल्क व्यवस्था के खिलाफ फैसला सुनाया, जिसे 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) के तहत लागू किया गया था. इस फैसले के बाद, अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से शुरू होने वाली 150 दिनों की अवधि के लिए सभी देशों से आयात पर एक समान 10 प्रतिशत शुल्क लागू कर दिया.
इन परिवर्तनों के कारण फरवरी में मुख्य वार्ताकारों के बीच होने वाली बैठक स्थगित कर दी गई. अप्रैल में वाशिंगटन में बातचीत तब फिर से शुरू हुई, जब जैन के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 20 से 23 अप्रैल तक अमेरिका का दौरा किया. नई दिल्ली में होने वाली आगामी बैठक का उद्देश्य उन वार्ताओं को आगे बढ़ाना और यह आकलन करना है कि संशोधित टैरिफ ढांचा प्रस्तावित व्यापार समझौते को कैसे प्रभावित करता है.
अधिकारियों और व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते में संशोधन की आवश्यकता हो सकती है, क्योंकि अब सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर समान 10 प्रतिशत टैरिफ लागू है.
-भारत एक्सप्रेस
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