देश के पश्चिमी सेक्टर और अरब सागर में ट्राई-सर्विसेज़ एक्सरसाइज त्रिशूल (Exercise TRISHUL) पूरे ज़ोरों पर चल रही है और अगले हफ़्ते सौराष्ट्र तट पर बड़े पैमाने पर एम्फीबियस ड्रिल के साथ यह खत्म होगी. भारतीय सेना की दक्षिणी कमान इन दिनों ‘त्रिशूल’ अभ्यास के बड़े फ्रेमवर्क के तहत कई ट्राई-सर्विसेज अभ्यासों में हिस्सा ले रही है, ताकि JAI – जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन के मंत्र को अपनाते हुए फुल-स्पेक्ट्रम जमीन-समुद्र-हवा इंटीग्रेशन को परखा जा सके.
30 अक्टूबर को शुरू हुए इस अभ्यास का मकसद मिलिट्री की ऑपरेशनल तैयारी को टेस्ट करना और तीनों सर्विसेज़ और दूसरे संगठनों के बीच तालमेल को मज़बूत करना है. इसमें हज़ारों सैनिक, फाइटर जेट, युद्धपोत, सबमरीन, टैंक, तोपें और कई दूसरे हथियार और सिस्टम शामिल हैं.
सशस्त्र बलों की बढ़ती मल्टी-डोमेन क्षमताओं और रक्षा में आत्मनिर्भरता पर फोकस को दिखाते हुए, एक्सरसाइज त्रिशूल कई डोमेन में इंटीग्रेटेड तैयारी को मज़बूत करने के लिए मिशन-फोकस्ड लक्ष्य के साथ शुरू हुई.
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, साइबर, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन, इंटेलिजेंस, निगरानी और टोही के साथ-साथ एयर डिफेंस कंट्रोल और रिपोर्टिंग को कवर करने के लक्ष्य के साथ ये अभ्यास किए जा रहे हैं. ये अभ्यास जमीन, समुद्र और हवा के सहज इंटीग्रेशन के ज़रिए कोऑर्डिनेटेड जॉइंट फायरिंग के लिए वर्चुअल और फिजिकल दोनों डोमेन पर हावी होने के लिए ट्राई-सर्विस की तैयारी को दर्शाते हैं.
पाकिस्तान के साथ टकराव के बाद पहली बड़ी मिलिट्री एक्सरसाइज
अधिकारियों ने बताया कि इस एक्सरसाइज का आखिरी फेज़ सौराष्ट्र तट पर एम्फीबियस ड्रिल के साथ खत्म होगा, जिसमें बीच लैंडिंग ऑपरेशन होंगे और ज़मीन-समुद्र-हवा के पूरे इंटीग्रेशन को परखा जाएगा. यह भारतीय सेना की कई डोमेन में पावर दिखाने की क्षमता को भी दिखाता है. इस एक्सरसाइज में वेस्टर्न नेवल कमांड, साउथ वेस्टर्न एयर कमांड और आर्मी की वेस्टर्न कमांड शामिल हैं.
यह मई में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के साथ चार दिन के टकराव के बाद पहली बड़ी मिलिट्री एक्सरसाइज है. 30 अक्टूबर को शुरू हुआ यह अभ्यास दो सप्ताह तक चलेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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