India’s Rivers: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा कि भारत की नदियाँ केवल विरासत का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये ‘प्रगति के राजमार्ग’ के रूप में उभर रही हैं. उन्होंने केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के एक लेख का हवाला देते हुए इस बात पर जोर दिया कि पुनर्जीवित जलमार्ग विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जलमार्गों के माध्यम से देश में लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और बुनियादी ढाँचे को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत किया गया है.
देश में जलमार्गों का बढ़ता महत्व
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 2014 में केवल पाँच चालू राष्ट्रीय जलमार्ग थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 30 से अधिक हो गई है. अंतर्देशीय जलमार्गों पर माल की आवाजाही में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. 2013-14 में यह लगभग 18 मिलियन टन था, जो अब कई गुना बढ़कर 145 मिलियन टन के पार पहुँच गया है. सरकार का लक्ष्य 2027 तक 76 जलमार्गों को चालू करने और कार्गो यातायात को 156 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) तक बढ़ाना है.
कनेक्टिविटी और विकास का विजन
पीएम मोदी के विजन के तहत, गंगा, ब्रह्मपुत्र और केरल के बैकवाटर्स जैसे जलमार्ग लॉजिस्टिक्स और पर्यटन में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. वाराणसी, कोलकाता, पटना, डिब्रूगढ़ और गुवाहाटी जैसे प्रमुख टर्मिनलों को आधुनिक सुविधाओं, जैसे इलेक्ट्रिक शोर लिंक और 24 घंटे नेविगेशन सुविधाओं से लैस किया जा रहा है. सरकार क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों के साथ लगभग 5000 किलोमीटर लंबा क्षेत्रीय जलमार्ग ग्रिड तैयार करने पर भी काम कर रही है. यह विकास न केवल माल ढुलाई की लागत कम करेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा और पूर्वोत्तर भारत के विकास को गति देगा.
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