Indore Police Extortion Case: इंदौर/जयव्यास: आमतौर पर पुलिस का काम अपराधियों पर लगाम कसना और उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाना होता है. लेकिन क्या हो जब पुलिस की वर्दी ही वसूली का हथियार बन जाए? मध्य प्रदेश के इंदौर से खाकी को शर्मसार कर देने वाला एक ऐसा ही मामला सामने आया है. विजय नगर थाने के चार पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि वे आगर मालवा से एक ड्रग तस्कर को पकड़कर लाए, लेकिन उसे थाने ले जाने के बजाय शहर के एक 5-स्टार होटल में दो दिन तक बंधक बनाकर रखा और 5 लाख रुपये की मोटी वसूली की.
थाने के बजाय 5-स्टार होटल की ‘डील’
यह पूरी घटना नवंबर 2024 की है. जानकारी के अनुसार, विजय नगर थाना (Vijay Nagar Thana Indore) प्रभारी को आगर मालवा के बड़ौद में तस्कर वसीम की सूचना मिली थी. इसके बाद सहायक उपनिरीक्षक (ASI) भूपेंद्र सिंह गुर्जर, हेड कॉन्स्टेबल मुकेश सिंह जादौन, कॉन्स्टेबल कपिल सोनानिया और कॉन्स्टेबल राधेश्याम राठौर (उर्फ राधे) को वसीम को पकड़ने के लिए भेजा गया.
ये पुलिसकर्मी थाने के रोजनामचा में बाकायदा एंट्री करके रवाना हुए. 22 नवंबर 2024 को उन्होंने वसीम को उठाया, लेकिन इंदौर लाकर उसे थाने में पेश करने के बजाय विजय नगर के ही एक 5-स्टार होटल में ले गए. आरोप है कि वहां उसे दो दिन तक बंधक (Indore Drug smuggler hostage) बनाकर रखा गया. घरवालों को फोन कर 5 लाख रुपये मंगाए गए और रकम मिलने के बाद तस्कर को गुपचुप तरीके से छोड़ दिया गया.
थाना प्रभारी से बोला सफेद झूठ
वसूली करने के बाद जब ये पुलिसकर्मी बड़ौद से लौटे, तो थाना प्रभारी पटेल ने तस्कर के बारे में पूछा. इस पर इन चारों ने सफेद झूठ बोलते हुए कहा कि, “उसका मोबाइल बंद था, वह हाथ नहीं लगा. हमें खाली हाथ ही लौटना पड़ा.”
टॉवर लोकेशन ने उगला सच
मामले की भनक लगते ही शिकायत तत्कालीन एसीपी (ACP) आदित्य पटले तक पहुंची, जिसके बाद इस पूरे ‘काले खेल’ की परतें उधड़ गईं. जांच में चारों पुलिसवालों और तस्कर की टॉवर लोकेशन (Tower Location) उसी 5-स्टार होटल की निकली. कॉल डिटेल रिपोर्ट से भी इस पूरी वसूली और बंधक बनाए जाने की पुष्टि हो गई. आरोपियों ने भी अपने बयान में पुलिसवालों की इस करतूत को उजागर कर दिया.
महकमा कर रहा ‘लीपापोती’ (Indore Police corruption news)
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर मामले में जांच पूरी होने के बावजूद अब तक किसी भी पुलिसवाले पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. तत्कालीन एसीपी आदित्य पटले ने 18 अक्टूबर 2025 को ही अपनी जांच रिपोर्ट (09 ए/25) डीसीपी जोन-2 को सौंप दी थी. इस रिपोर्ट में थाना प्रभारी का अपने स्टाफ पर नियंत्रण न होने की बात भी स्पष्ट रूप से कही गई है.
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हाल ही में (मई 2026 में) डीसीपी ने इससे जुड़ी कुछ और जानकारियां मांगी थीं, लेकिन जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद एसीपी आदित्य पटले का तबादला कर दिया गया. फिलहाल, पुलिस के आला अधिकारी इस पूरे मामले को ‘अंडर प्रोसेस’ (Under Process) बताकर गोलमोल जवाब दे रहे हैं. यह स्थिति साफ इशारा कर रही है कि पुलिस महकमा अपने दागी पुलिसकर्मियों को बचाने और मामले की लीपापोती करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है.
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