जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी नागरिकों के अवैध रूप से रहने और फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारतीय पहचान हासिल करने के मामलों में क्राइम ब्रांच ने बहुत बड़ा खुलासा किया है. क्राइम ब्रांच जम्मू की स्पेशल क्राइम विंग (SCW) ने चार जिलों में दर्ज आठ मामलों की जांच पूरी करते हुए संबंधित अदालतों में चार्जशीट दाखिल कर दी है. इस जांच में कुल 65 लोगों की भूमिका सामने आई थी, जिनमें से 50 आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है, जबकि 15 लोगों की मौत हो चुकी है.
वैध पासपोर्ट पर आए भारत
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला दशकों पुराना है. पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के कुछ नागरिक 1970 के दशक के आखिर में वैध यात्रा दस्तावेजों के जरिए भारत आए थे. लेकिन भारत आने के बाद वे वापस लौटने के बजाय जम्मू संभाग के अलग-अलग इलाकों में अवैध रूप से रहने लगे.
आरोप है कि इन लोगों ने चालाकी से अपनी पाकिस्तानी नागरिकता छिपाकर धोखाधड़ी से भारतीय पहचान पत्र बनवा लिए. इतना ही नहीं, इनमें से कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी विभागों में नौकरियां तक हासिल कर लीं. क्राइम ब्रांच की जांच में पाकिस्तान के सिंध, लाहौर, गुजरांवाला और सरगोधा के साथ-साथ PoK के मीरपुर, रावलाकोट और कोटली से ताल्लुक रखने वाले परिवारों की पहचान की गई है. ये परिवार जम्मू, पुंछ, राजौरी और कठुआ जिलों के अखनूर, मेंढर, थन्नामंडी और दरहाल जैसे इलाकों में रह रहे थे.
भारतीय सहयोगियों पर भी शिकंजा
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था. जांच के दौरान विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम की कई गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई. इस पूरे खेल में कुछ भारतीय जीवनसाथियों, रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों की मिलीभगत भी सामने आई है, जिन्होंने फर्जी कागजात बनवाने की साजिश में मदद की थी. ऐसे मददगारों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की गई है. फिलहाल जम्मू, पुंछ, राजौरी और कठुआ की अदालतों में चार्जशीट पेश कर दी गई है, जहां आगे का कानूनी ट्रायल चलेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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