Jammu Special Committee: जम्मू-कश्मीर के रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील ‘जम्मू क्षेत्र’ में बीते कुछ सालों में हुए संदिग्ध जनसांख्यिकीय बदलावों और अवैध घुसपैठ की पड़ताल के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. दिल्ली से केंद्र सरकार की एक उच्चस्तरीय (High-Level) कमेटी तीन दिवसीय दौरे पर जम्मू पहुंची है.
यह हाई-लेवल कमेटी जम्मू संभाग के अलग-अलग संवेदनशील इलाकों में धरातल पर जाकर अवैध घुसपैठ, रोहिंग्या व बांग्लादेशी नागरिकों की बस्तियों और अन्य संदिग्ध कारणों से स्थानीय आबादी के ढांचे में आए बदलावों का बारीक आकलन करने में जुट गई है.
जगती में कश्मीरी पंडितों से संवाद(Jammu Special Committee)
अपने तीन दिवसीय मैराथन ग्राउंड सर्वे के दौरान केंद्रीय कमेटी सबसे पहले कश्मीरी विस्थापित पंडितों के प्रमुख गढ़ ‘जगती’ इलाके में पहुंची. वहां अधिकारियों की टीम ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों से सीधे मुलाकात की और उनकी सुरक्षा, पुनर्वास व स्थानीय जनसांख्यिकी से जुड़ी चिंताओं को गंभीरता से सुना.
इसके अलावा यह कमेटी अंतर्राष्ट्रीय सीमा (IB) से सटे सीमावर्ती गांवों का रुख कर रही है, जहां वे पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (POJK) के शरणार्थियों और वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों से मुलाकात कर जमीनी हकीकत, जनसांख्यिकीय दबाव और सुरक्षा स्थिति का जायजा लेगी.
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रोहिंग्या-बांग्लादेशियों के अवैध ठिकानों की जांच
कमेटी के रडार पर सबसे मुख्य एजेंडा जम्मू के उन इलाकों का निरीक्षण करना है, जहां पिछले कुछ दशकों में अवैध रूप से आए रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिम शरणार्थी बसे हुए हैं. सुरक्षा एजेंसियों को लंबे समय से इन अवैध बस्तियों के कारण इलाके की डेमोग्राफी बदलने और सुरक्षा संबंधी खतरे की आशंका रही है.
तीन दिनों तक जम्मू के शहरी, ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों का गहन जायजा लेने के बाद कमेटी के सदस्य वापस दिल्ली लौटेंगे और वहां जाकर केंद्र सरकार तथा गृह मंत्रालय (MHA) को अपनी विस्तृत और कड़क रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में केंद्र सरकार कोई बड़ा और ऐतिहासिक फैसला ले सकती है.
-भारत एक्सप्रेस
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