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काशी की अलौकिक संस्कृति से सजेगी दिल्ली, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में इस दिन गूंजेगा ‘स्वरात्मिका संगीत महोत्सव’

नई दिल्ली में 6 सितंबर को ‘काशी-रत्न सम्मान 2026’, ‘सहजानंद सरस्वती सेवाश्री सम्मान 2026’ और ‘स्वरात्मिका संगीत महोत्सव’ का आयोजन होगा.

नई दिल्ली: काशी का नाम आते ही मन में सिर्फ एक शहर की तस्वीर नहीं उभरती. यह वह धरती है, जहां ज्ञान, अध्यात्म, संगीत, कला, साधना और लोकजीवन सदियों से एक-दूसरे के साथ चलते आए हैं. इसी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को केंद्र में रखते हुए राजधानी दिल्ली में एक खास आयोजन होने जा रहा है.

वाराणसी के स्वरात्मिका फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से पं. श्रीयुत लाल बहादुर राय की स्मृति में ‘काशी-रत्न सम्मान 2026’, ‘सहजानंद सरस्वती सेवाश्री सम्मान 2026’ और ‘स्वरात्मिका संगीत महोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा. कार्यक्रम 6 सितंबर, रविवार को शाम 4 बजे से 7 बजे तक कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में होगा.

यह आयोजन सी.सी.आर.टी., संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और स्वरात्मिका फाउंडेशन ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है. कार्यक्रम के संरक्षक काशी के राजगुरुमठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अनन्तानन्द सरस्वती जी हैं.

कई बड़ी हस्तियां रहेंगी मौजूद

समारोह में कला, शिक्षा, समाजसेवा और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई जाने-माने लोग मौजूद रहेंगे. इनमें पद्मभूषण रामबहादुर राय, अध्यक्ष, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली; पद्म श्री अशोक भगत; द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित पद्म श्री प्रो. डॉ. सुनील डबास; पूर्व राजदूत और भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी ओमप्रकाश गुप्ता; आचार्य (डॉ.) अनिल कुमार राय, कुलपति, महामना ज्योतिबाफुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली; और प्रो. सुनील कुमार विश्वकर्मा, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी प्रमुख रूप से शामिल हैं.

इसके अलावा शिक्षाविदों, कला-संस्कृति से जुड़े विशेषज्ञों, समाजसेवियों और सामाजिक जीवन में सक्रिय कई अन्य विशिष्ट लोगों की भी उपस्थिति रहेगी.

तीन हस्तियों को मिलेगा ‘काशी-रत्न सम्मान’

कार्यक्रम में तीन प्रमुख व्यक्तित्वों को ‘काशी-रत्न सम्मान 2026’ से सम्मानित किया जाएगा. इनमें स्वर्गीय डॉ. रघुनाथ सिंह, स्वर्गीय ‘लोकबंधु’ राजनारायण और पद्मश्री अशोक भगत शामिल हैं. वहीं, अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वाले 20 लोगों को ‘सहजानंद सरस्वती सेवाश्री सम्मान 2026’ प्रदान किया जाएगा. ये सम्मान समाजसेवा, शिक्षा, चिकित्सा, संगीत, पर्यावरण, सांस्कृतिक संरक्षण और लोककल्याण जैसे क्षेत्रों में योगदान के लिए दिए जा रहे हैं.

सम्मान पाने वालों में परशुराम सिंह, प्रो. रामराज उपाध्याय, डॉ. सुभाष सरदार सिंह राजपूत, डॉ. शोभना तेहरा राजपूत, जमुना शुक्ला, सुखदेव मिश्रा, डॉ. एन. मूर्ति, कपिन्द्र नाथ तिवारी, बृजेश सिंह, डॉ. खुशबू, डॉ. आशीष तिवारी, वैभव कुमार सिंह, डॉ. तेजस्वी एच.आर., वेद व्यास, अन्तरा झा, रामबाबू सिंह, रजनीश कुमार, यज्ञदत्त त्यागी, डॉ. संदीप कुमार तिवारी और विवेक जोशी के नाम शामिल हैं.

सम्मान के साथ संगीत की भी महफिल

कार्यक्रम को सिर्फ पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रखा गया है. इसके साथ ‘स्वरात्मिका संगीत महोत्सव’ भी होगा, जिसमें संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियां दर्शकों को देखने-सुनने को मिलेंगी.

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. यश त्यागी और समूह की गणेश वंदना से होगी. इसके बाद दिव्यांश हर्षित श्रीवास्तव संतूर वादन प्रस्तुत करेंगे. उज्जित उदय कुमार तबले पर संगत देंगे, जबकि ईप्सा नरूला कथक प्रस्तुति देंगी.

संस्कृति और लोकमंगल को एक मंच पर लाने की कोशिश

स्वरात्मिका फाउंडेशन ट्रस्ट के मुताबिक, इस आयोजन का मकसद केवल प्रतिभाओं और विशिष्ट लोगों को सम्मान देना नहीं है. इसके जरिए भारतीय संस्कृति की उन अलग-अलग धाराओं को एक साथ सामने लाने की कोशिश की जा रही है, जिनमें ज्ञान और साधना, शास्त्र और लोक, तर्क और श्रद्धा, कला और अध्यात्म साथ-साथ दिखाई देते हैं.

काशी की सांस्कृतिक परंपरा को आधार बनाकर आयोजित यह समारोह उन लोगों के योगदान को भी सामने लाएगा, जो समाजसेवा, लोककल्याण और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रहे हैं.

आयोजकों का मानना है कि भारतीय परंपरा की सबसे बड़ी ताकत यही रही है कि यहां संस्कृति को सिर्फ कला या विरासत तक सीमित नहीं माना गया, बल्कि उसे समाज और लोककल्याण से भी जोड़ा गया है. इसी विचार को आगे बढ़ाने का संदेश इस आयोजन के जरिए देने की कोशिश होगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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