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1990 कश्मीरी पंडित हत्याकांड में SIA की बड़ी कार्रवाई, कई ठिकानों पर छापेमारी

Kashmiri Pandit case: सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ और उनके बेटे की 1990 में हुई हत्या के मामले में जम्मू-कश्मीर SIA ने कई स्थानों पर छापेमारी की है. गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद पुराने मामलों की दोबारा जांच तेज हुई है और एजेंसी हत्या से जुड़े सुराग व साक्ष्य जुटा रही है.

Kashmiri Pandit case

Kashmiri Pandit case

Kashmiri Pandit case: जम्मू-कश्मीर में 1990 के दशक के दौरान कश्मीरी पंडितों और अन्य अल्पसंख्यकों की हत्या से जुड़े पुराने मामलों की जांच एक बार फिर तेज हो गई है. इसी कड़ी में स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने अनंतनाग में कवि सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ और उनके 27 वर्षीय बेटे की हत्या से जुड़े मामले में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की है. एजेंसी की कार्रवाई का उद्देश्य मामले से जुड़े सुराग और साक्ष्य जुटाना बताया जा रहा है.

29 अप्रैल 1990 को घर से किया गया था अगवा

सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ और उनके बेटे को 29 अप्रैल 1990 को अनंतनाग स्थित उनके घर से अगवा किया गया था. परिवार के लिए यह घटना उस दौर की भयावह परिस्थितियों का हिस्सा थी, जब घाटी में आतंकवाद के बीच कश्मीरी पंडित समुदाय को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आ रही थीं.

दो दिन बाद बरामद हुए थे दोनों के शव

अगवा किए जाने के दो दिन बाद, 1 मई 1990 को सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ और उनके बेटे के शव बरामद किए गए थे. इस घटना ने कश्मीर में अल्पसंख्यक समुदाय के बीच भय और असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया था. वर्षों बाद अब इस मामले की जांच को फिर से गति दी गई है.

गृह मंत्रालय के निर्देश पर पुराने मामलों की जांच

1990 के दशक में कश्मीर में अल्पसंख्यकों की हत्याओं से जुड़े मामलों की दोबारा जांच के लिए गृह मंत्रालय की ओर से निर्देश दिए गए हैं. इसके बाद जांच एजेंसियां पुराने मामलों से जुड़े दस्तावेजों, गवाहियों और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा कर रही हैं. इसी क्रम में SIA ने सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ और उनके बेटे की हत्या के मामले को भी जांच के दायरे में लिया है.

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छापेमारी से जुटाए जा रहे अहम सुराग

SIA की ओर से जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग स्थानों पर तलाशी और छापेमारी की जा रही है. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस वारदात में कौन-कौन लोग शामिल थे और हत्या के पीछे की पूरी साजिश क्या थी. जांच आगे बढ़ने के साथ संदिग्धों की भूमिका और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है. तीन दशक से अधिक पुराने इस मामले में SIA की ताजा कार्रवाई ने कश्मीरी पंडितों से जुड़े लंबित मामलों की जांच को फिर चर्चा में ला दिया है. अब जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों और तथ्यों पर सभी की नजर है.

भारत एक्सप्रेस



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