FCRA Bill 2026 Sent To JPC: मॉनसून सत्र के दौरान विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम (FCRA Bill 2026) को लेकर संसद में जबरदस्त सियासी घमासान देखने को मिला. भारी हंगामे और विपक्ष की तीखी नोकझोंक के बाद केंद्र सरकार ने इस विवादास्पद बिल को विस्तृत समीक्षा के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का फैसला किया है.
संसद में तीखी नोकझोंक (JPC on FCRA Bill)
लोकसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जैसे ही इस बिल को JPC में भेजने का प्रस्ताव रखा, विपक्ष ने हल्ला बोल दिया. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर यह बिल ला रही है और विपक्ष पूरी तरह इसके खिलाफ है. वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि यह बिल किसी भी तरह से ‘अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है.’
क्यों मचा है बवाल?
25 मार्च 2026 को पेश किए गए इस बिल में सबसे ज्यादा विवाद एक नए कड़े प्रावधान पर है. नए नियम के मुताबिक, अगर किसी NGO, ट्रस्ट या धार्मिक संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द होता है या सरेंडर किया जाता है, तो विदेशी चंदे से बनी उसकी सभी संपत्तियां एक सरकारी प्राधिकरण (Authority) के अधीन चली जाएंगी. हालांकि, इसमें सजा की अधिकतम अवधि को 5 साल से घटाकर 1 साल करने का भी प्रस्ताव है, लेकिन विपक्ष और कई संस्थाओं का मानना है कि इस कानून से कार्यपालिका को मनमानी करने का ‘असीमित अधिकार’ मिल जाएगा.
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शीतकालीन सत्र तक टला फैसला
विपक्ष के व्यापक विरोध को देखते हुए अब इस बिल (FCRA Bill 2026) की गहन जांच JPC करेगी. इस समिति में लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 (कुल 31) सांसद शामिल होंगे. अब इस समिति को अपनी विस्तृत रिपोर्ट संसद के आगामी शीतकालीन सत्र 2026 के पहले हफ्ते तक सौंपनी होगी. फिलहाल, विदेशी चंदे पर लगाम कसने वाले इस बिल का भविष्य कुछ महीनों के लिए JPC के पाले में चला गया है.
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