Katayi Mill Workers Pension Issue
Katayi Mill Workers Pension Issue: कभी प्रदेश की सहकारी कताई मिलों को अपनी मेहनत और समर्पण से चलाने वाले श्रमिक आज बुढ़ापे में आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. वर्षों तक मिलों में काम कर उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले ये श्रमिक अब अपने हक और बकाया भुगतान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं. इसी समस्या को लेकर श्रमिकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजकर न्याय की मांग की है.
20- 25 साल नौकरी करने के बाद पेंशन मात्र 800, 900 रूपए
श्रमिकों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन के 20 से 25 वर्ष कताई मिलों में सेवा देते हुए बिताए, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें मात्र 800 से 900 रुपये मासिक पेंशन मिल रही है. उनका कहना है कि मौजूदा समय में इतनी कम राशि में दवाइयों, भोजन और अन्य जरूरी खर्चों का वहन करना लगभग असंभव है. बुढ़ापे में उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
पीएफ की राशि भी अभी तक नहीं मिली- कताई मिल श्रामिक
पूर्व कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि नौकरी के दौरान उनके वेतन से भविष्य निधि (पीएफ) की राशि काटी गई, लेकिन उसे समय पर भविष्य निधि कार्यालय में जमा नहीं कराया गया. इसके चलते कई श्रमिकों को आज तक उनकी पीएफ की पूरी रकम नहीं मिल सकी है. उनका कहना है कि वर्षों बीत जाने के बावजूद इस मामले का समाधान नहीं हो पाया है.श्रमिकों ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि वर्ष 1995-96 के बाद से उन्हें बोनस का भुगतान नहीं किया गया. साथ ही शासनादेश के अनुसार बकाया राशि पर 9.5 प्रतिशत ब्याज भी नहीं जोड़ा गया है. इससे कर्मचारियों को आर्थिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
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सरकार श्रमिकों के कल्याण और अधिकारों की बात करती है, लेकिन…
श्रमिकों का कहना है कि सरकार श्रमिकों के कल्याण और अधिकारों की बात करती है, लेकिन कताई मिलों के पूर्व कर्मचारी आज भी अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर शिकायतें करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग करते हुए श्रमिकों ने कहा कि उनके लंबित भुगतान, पीएफ, बोनस और पेंशन संबंधी मामलों का शीघ्र निस्तारण कराया जाए. उनका कहना है कि जीवन भर मेहनत करने के बाद बुढ़ापे में सम्मानजनक जीवन जीना उनका अधिकार है और सरकार को उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान करना चाहिए.
भारत एक्सप्रेस
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