केरल विधानसभा चुनाव 2026 में एलडीएफ (LDF) के किले को ढहाने वाली कांग्रेस अब अपनी ही ‘किच-किच’ में फंस गई है. जहां एक ओर पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी और तमिलनाडु में विजय थलापति के शपथ ग्रहण की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, वहीं केरल में कांग्रेस यह तय नहीं कर पा रही है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा. आलम यह है कि बंद कमरों की लड़ाई अब ईमेल और सार्वजनिक बयानों तक पहुँच गई है, जिससे पार्टी की ‘प्रचंड जीत’ की चमक फीकी पड़ती दिख रही है.
‘केसी’ (KC) बनाम ‘मुस्लिम लीग’ की जंग
दरअसल केरल में मुख्यमंत्री की रेस त्रिकोणीय हो चुकी है. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के अधिकतर विधायक के.सी. वेणुगोपाल को कमान सौंपने के पक्ष में हैं लेकिन यूडीएफ (UDF) गठबंधन की सबसे बड़ी सहयोगी ‘मुस्लिम लीग’ ने पेंच फंसा दिया है. मुस्लिम लीग चाहती है कि वी.डी. सतीशन को मुख्यमंत्री बनाया जाए. सहयोगी दल के इस दबाव ने दिल्ली में बैठे मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की टेंशन बढ़ा दी है.
पर्यवेक्षक के हाथ लगी लिस्ट ने खोली पोल!
केरल कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी तब सार्वजनिक हो गई जब एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई. इसमें पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक के हाथ में एक सूची दिखी, जिसमें विधायकों की पसंद कोड वर्ड में लिखी थी.
बता दें कि ज्यादातर विधायकों के नाम के आगे ‘KC’ लिखा था, जो के.सी. वेणुगोपाल के लिए था. तो वहीं कुछ जगहों पर “KC+RC” (वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला) लिखा मिला. इस ‘सीक्रेट बैलेट’ की गोपनीयता भंग होने से पार्टी के भीतर भूचाल आ गया है.
विधायक नीलकांतन के ईमेल ने मचाया हड़कंप
विवाद और तब गहरा गया जब उडुमा से विधायक के. नीलकांतन ने सीधे एआईसीसी (AICC) पर्यवेक्षकों मुकुल वासनिक और अजय माकन को ईमेल भेजकर गंभीर आरोप लगा दिए. नीलकांतन का कहना है कि विधायक दल की बैठक में उन्होंने अपनी पसंद स्पष्ट बताई थी, लेकिन वायरल सूची में उनके नाम के आगे कोई एंट्री नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या विधायकों की राय के साथ कोई छेड़छाड़ की जा रही है?
खरगे और राहुल गांधी करेंगे ‘फाइनल कॉल’
हालांकि केरल विधायक दल ने एक लाइन का प्रस्ताव पारित कर अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर छोड़ दिया है, लेकिन मतभेद इतने गहरे हैं कि बिना राहुल गांधी के हस्तक्षेप के समाधान मुश्किल लग रहा है. रमेश चेन्निथला, के.सी. वेणुगोपाल और वी.डी. सतीशन—इन तीन दिग्गजों की महत्वाकांक्षाओं के बीच कांग्रेस इस डर में है कि कहीं यह ‘अंतर्कलह’ सरकार बनने से पहले ही उसे कमजोर न कर दे.
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-भारत एक्सप्रेस
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