Kharge Statement Controversy: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है. चेन्नई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खरगे ने बीजेपी और एआईएडीएमके गठबंधन पर सवाल उठाते हुए पीएम मोदी पर तीखा हमला बोला. इसी दौरान उन्होंने एक ऐसा शब्द इस्तेमाल किया जिसने पूरे राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी. बीजेपी नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री और देश के मतदाताओं का अपमान बताया और कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए नेता के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना गलत है.
बीजेपी का ऐतराज
खरगे के बयान पर बीजेपी ने कड़ा विरोध जताया और अब इस मामले को चुनाव आयोग तक पहुंचा दिया है. पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों को पत्र लिखकर पांच मांगें रखी हैं. बीजेपी का कहना है कि यह बयान आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है और इस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए.
बीजेपी की पांच मांगें
बीजेपी ने पत्र में कहा है कि खरगे को सार्वजनिक रूप से माफी मांगने या बयान वापस लेने का निर्देश दिया जाए. साथ ही चुनाव प्रचार से संबंधित उचित प्रतिबंध लगाए जाएं. पार्टी ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 175, 171/174 और 356(1) के तहत कार्रवाई की मांग की है. इसके अलावा विवादित बयान को चुनावी प्रचार सामग्री और डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश देने की बात भी कही गई है. साथ ही ऐसे आदेश पारित करने की मांग की गई है जिससे चुनावी प्रक्रिया की गरिमा बनी रहे और प्रचार निष्पक्ष व शांतिपूर्ण तरीके से हो.
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चुनावी माहौल में गरमी
तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होना है और ऐसे समय में खरगे का बयान राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है. कांग्रेस और उसके सहयोगी दल सामाजिक न्याय और समानता की बात कर रहे हैं, वहीं बीजेपी इस विवाद को जनता के बीच उठाकर विपक्ष को घेरने की कोशिश कर रही है. इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और अधिक गरमा दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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