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कोटा में प्रदर्शन के दौरान बवाल; संभागीय आयुक्त कार्यालय में घुसने की कोशिश, पुलिस-प्रदर्शनकारियों में झड़प

कोटा में कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल के नेतृत्व में हुए बड़े प्रदर्शन के दौरान उस समय तनाव बढ़ गया जब प्रदर्शनकारी संभागीय आयुक्त कार्यालय में घुसने की कोशिश करने लगे.

कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल

कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल

रिपोर्ट – तेज़पाल सिंह बग्गा


राजस्थान के कोटा शहर में गुरुवार को माहौल उस समय अचानक गर्म हो गया जब कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल के नेतृत्व में हजारों ग्रामीण और पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए. यह प्रदर्शन कोटा संभागीय आयुक्त कार्यालय के बाहर आयोजित किया गया था, लेकिन देखते ही देखते हालात ऐसे बन गए कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई.

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि स्थानीय प्रशासन, खासकर कोटा विकास प्राधिकरण (Kota Development Authority) वन विभाग और पुलिस व्यवस्था ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है. लोगों का कहना था कि उनकी शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा सख्ती की जा रही है और कई मामलों में मनमानी फैसले लिए जा रहे हैं.

जब प्रदर्शनकारी अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने पहुंचे, तभी कुछ लोग सुरक्षा बैरिकेड्स को पार कर दफ्तर परिसर में घुसने की कोशिश करने लगे. मौके पर मौजूद पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान स्थिति बिगड़ गई. दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और धक्का-मुक्की ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया.

कुछ मिनटों के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया. वहां मौजूद लोगों के मुताबिक, स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा.

वरिष्ठ अधिकारियों की एंट्री से संभला मामला

हालात बिगड़ते देख वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उन्हें शांत कराया. काफी समझाइश के बाद स्थिति नियंत्रण में आई. इसके बाद प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन संभागीय आयुक्त को सौंप दिया.

प्रशासन की ओर से कहा गया कि स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में ले लिया गया है और किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है. हालांकि, पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रखा गया है.

क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें?

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कुछ प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें शामिल हैं-

  • कोटा विकास प्राधिकरण की कार्रवाइयों की स्वतंत्र समीक्षा
  • वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पर रोक
  • ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज मामलों की निष्पक्ष जांच
  • प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और राहत

प्रदर्शन के बाद प्रहलाद गुंजल ने साफ कहा कि अगर प्रशासन ने जल्द ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है. उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में प्रदर्शन का दायरा और बढ़ाया जा सकता है.

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भारत एक्सप्रेस



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