रिपोर्ट- अजय भटनागर
मध्य प्रदेश में सरकारी खरीदी में कथित गड़बड़ियों को लेकर एक वरिष्ठ अधिकारी का वीडियो सामने आने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) संजय दुबे इस वीडियो में नगर पालिकाओं की खरीदी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं. वीडियो में उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से की गई जांच में कई ऐसी अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनसे सरकारी खजाने को भारी नुकसान होने की आशंका है.
मामला सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, वहीं सरकार ने भी जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया है.
बताया जा रहा है कि यह वीडियो कुछ महीने पहले हुई विभागीय बैठक का है. हालांकि, अब इसके वायरल होने के बाद मंत्रालय से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस मामले की चर्चा हो रही है.
1134 करोड़ रुपये की खरीदी में गड़बड़ी का दावा
वायरल वीडियो में संजय दुबे विभागीय बैठक को संबोधित करते हुए खरीदी प्रक्रिया में सामने आई विसंगतियों का जिक्र करते हैं. उनके मुताबिक, प्रदेश की 374 नगरीय निकायों में करीब 1,134 करोड़ रुपये की खरीदी की जांच की गई. इस दौरान कई सामानों की कीमतों और खरीद के रिकॉर्ड में अंतर देखने को मिला.
उन्होंने बताया कि अगर सामान की खरीद औसत बाजार मूल्य के हिसाब से की जाती, तो करीब 250 करोड़ रुपये तक की बचत संभव थी. इस खुलासे के बाद सरकारी खरीद में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
संजय दुबे ने बैठक में उदाहरण देते हुए बताया कि एक नगरीय निकाय में कचरा गाड़ी करीब 2 लाख रुपये में खरीदी गई, जबकि दूसरे निकाय में चार डस्टबिन जोड़कर तैयार की गई गाड़ी के लिए 6 लाख रुपये खर्च किए गए. उन्होंने यह भी बताया कि कुछ नगर पालिकाओं में एक करोड़ से डेढ़ करोड़ रुपये तक की कई कचरा गाड़ियां खरीदी गईं, जबकि सवाल यह है कि क्या उन निकायों में इतनी गाड़ियों के इस्तेमाल के लिए पर्याप्त वार्ड और जरूरत मौजूद थी.
LED बल्ब से लेकर फिनाइल तक, खरीद के दाम पर सवाल
बैठक में केवल कचरा गाड़ियों की खरीद ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामानों की कीमतों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए. वीडियो में बताया गया कि 200 एलईडी बल्ब की खरीद के लिए 60 लाख रुपये का बिल भुगतान किया गया.
इसी तरह, एक नगरीय निकाय में 60 वॉट की एलईडी लाइट 306 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से खरीदे जाने का जिक्र किया गया, जबकि भोपाल में इसी तरह की लाइट की कीमत 11,800 रुपये बताई गई. इन आंकड़ों के सामने आने के बाद खरीदी के रिकॉर्ड और वास्तविक कीमतों की जांच की जरूरत और बढ़ गई है.
फिनाइल की खरीद का उदाहरण देते हुए बताया गया कि सरदारपुर निकाय में इसकी कीमत 5 रुपये प्रति लीटर थी, जबकि राजगढ़ में इसके लिए 33,500 रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख किया गया. हालांकि, इन अलग-अलग कीमतों और भुगतानों के पीछे की परिस्थितियों का आधिकारिक जांच के जरिए स्पष्ट होना जरूरी है.
संजय दुबे ने बैठक में माना कि समय की कमी के कारण पहले कई मामलों में कार्रवाई नहीं हो पाती थी, लेकिन अब ऐसे मामलों में कार्रवाई करने की बात कही. उन्होंने यह भी बताया कि कुछ वेंडरों को चिह्नित किया गया है, जो एक साथ कई नगरीय निकायों में श्रमिक उपलब्ध कराने का काम कर रहे हैं. बैठक में बिजली के खंभों से लेकर दूसरे सामानों की खरीद और निकायों के खर्चों तक पर सवाल उठाए गए.
साइबर अटैक से 2,500 कंप्यूटर प्रभावित होने का दावा
इस बैठक में विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक और गंभीर मामला सामने आया. वीडियो में बताया गया कि विभागीय स्तर पर हुई चूक के कारण करीब 2,500 कंप्यूटर साइबर अटैक की चपेट में आए.
बैठक में दावा किया गया कि इस घटना के चलते महत्वपूर्ण डेटा, यूजर आईडी और पासवर्ड लीक हुए हैं. यहां तक कि पासवर्ड बदलने के बाद भी खरीद प्रक्रिया और विभागीय कामकाज से जुड़ा डेटा चोरी होने की आशंका जताई गई.
अगर इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह केवल तकनीकी लापरवाही का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी डेटा की सुरक्षा और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा. इस मामले में साइबर सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच भी अहम होगी.
जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा
वीडियो वायरल होने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार बड़े स्तर पर हो रहा है और अगर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो कई मंत्रियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
पटवारी ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार को केवल बयान देने के बजाय जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी चाहिए. विपक्ष ने इस मुद्दे को उठाकर सरकार से खरीदी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर जवाब मांगा है.
मामले को लेकर बढ़ते विवाद के बीच नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का बयान सामने आया.
उन्होंने कहा कि विभाग में होने वाली खरीदी पर निगरानी रखी जाती है और जहां भी गड़बड़ी पाई जाती है, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाती है. उनके मुताबिक, पहले भी ऐसे मामलों में कार्रवाई की गई है.
प्रतिमा बागरी ने यह भी कहा कि वायरल वीडियो में सामने आए मामलों की जांच कराई जाएगी. इसके साथ ही सरकारी खरीद के लिए इस्तेमाल होने वाले जेम (GeM) पोर्टल पर कथित गड़बड़ियों की भी जांच की जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.
अब जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें
इस पूरे मामले ने मध्य प्रदेश में सरकारी खरीदी की प्रक्रिया, अधिकारियों की जवाबदेही और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज कर दी है. एक तरफ विपक्ष सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार जांच कराने की बात कह रही है.
फिलहाल वायरल वीडियो में सामने आए आरोपों और आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि तथा जांच के नतीजों का इंतजार है. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि संबंधित विभाग इन मामलों की जांच कितनी तेजी से पूरी करता है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं.
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