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Mahadev Betting Case: हरि शंकर तिबरेवाल से जुड़ी कंपनियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 423 करोड़ की फ्रीज संपत्तियों पर अहम टिप्पणी

Mahadev Betting App Case: महादेव बेटिंग ऐप (Mahadev Betting App) मामला एक बार फिर सुर्खियों में है. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में फ्रीज की गई 423 करोड़ रुपये की वित्तीय संपत्तियों को लेकर फैसला सुनाया है. जिसमें अदालत ने कहा कि किसी भी जांच के दौरान संपत्तियों को केवल फ्रीज करना ही काफी नहीं है, बल्कि इन एसेट्स के आर्थिक मूल्य को भी सुरक्षित रखा जाए.

Mahadev Betting App Case

Mahadev Betting App Case

Mahadev Betting App Case: महादेव बेटिंग ऐप मामले में उद्योगपति हरि शंकर तिबरेवाल से जुड़ी कंपनियों को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. अदालत ने करीब 423 करोड़ रुपये मूल्य की फ्रीज वित्तीय संपत्तियों के संबंध में कहा कि जांच एजेंसियों का दायित्व केवल परिसंपत्तियों को फ्रीज करना नहीं है, बल्कि उनके आर्थिक मूल्य को भी सुरक्षित रखना आवश्यक है.

यह मामला हरि शंकर तिबरेवाल से संबद्ध कई कंपनियों के निवेश पोर्टफोलियो से जुड़ा है. जांच के दौरान इन कंपनियों के पास मौजूद प्रतिभूतियों और अन्य निवेशों को फ्रीज कर दिया गया था. संबंधित कंपनियों में ड्रीम अचीवर कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, डिस्कवरी बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड, फॉरेस्ट विनकॉम प्राइवेट लिमिटेड, ब्रिलियंट इन्वेस्टमेंट्स कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड, एबिलिटी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, एबिलिटी स्मार्टेक प्राइवेट लिमिटेड, एबिलिटी गेम्स लिमिटेड और सवर्ण भूमि वाणिज्य प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं.

लंबे समय तक फ्रीज रहने पर मूल्य गिरने का खतरा

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बाजार जोखिमों को लेकर चिंता जताई. अदालत ने कहा कि सूचीबद्ध शेयरों और बाजार आधारित निवेशों को लंबे समय तक फ्रीज रखने से उनके मूल्य में उतार-चढ़ाव का खतरा बना रहता है. ऐसे में केवल परिसंपत्तियों को रोककर रखना पर्याप्त नहीं माना जा सकता.

इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने हरि शंकर तिबरेवाल से जुड़ी कंपनियों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समक्ष एक उपयुक्त प्रस्ताव पेश करने की अनुमति दी है, ताकि निवेशित संपत्तियों के मूल्य को सुरक्षित रखने के विकल्पों पर विचार किया जा सके.

भविष्य के लिए मिसाल है यह फैसला

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह आदेश धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) से जुड़े मामलों में भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है. अदालत ने स्पष्ट किया कि लंबित जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान संपत्तियों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके वास्तविक आर्थिक मूल्य की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.

हरि शंकर तिबरेवाल से जुड़े इस मामले ने इसलिए भी ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि अदालत ने पहली बार इतने स्पष्ट शब्दों में एसेट वैल्यू प्रोटेक्शन यानी परिसंपत्तियों के आर्थिक मूल्य के संरक्षण पर जोर दिया है. हालांकि मामले के गुण-दोष और संपत्तियों के अंतिम भविष्य को लेकर फैसला संबंधित सक्षम प्राधिकरणों द्वारा ही किया जाएगा.

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विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह रुख न्यायिक संतुलन और आर्थिक व्यावहारिकता का बेहतर उदाहरण है, जो जांच प्रक्रिया और निवेशकों के आर्थिक हितों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

-भारत एक्सप्रेस



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