Mamata Banerjee On Malda Incident: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मालदा जिले में 7 न्यायिक अधिकारियों को भीड़ द्वारा पूरी रात बंधक बनाए जाने की घटना ने तूल पकड़ लिया है. इस गंभीर घटना पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी फटकार और जांच के आदेश के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. गुरुवार को ममता ने दावा किया कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया गया है. उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था बिगड़ने का ठीकरा EC पर फोड़ दिया है.
‘मेरी सारी शक्तियां छीन ली गई हैं’ (mamata banerjee malda incident)
मुर्शिदाबाद जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा कि मुझे नहीं पता कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है… किसी ने मुझे सूचित नहीं किया. उन्होंने शिकायत करते हुए कहा कि प्रशासन अब उनके हाथ में नहीं है. ममता ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा-
“कानून-व्यवस्था को चुनाव आयोग नियंत्रित कर रहा है… वे गृह मंत्री अमित शाह की सुनते हैं. प्रशासन में शीर्ष स्तर के सभी अधिकारियों को बदल दिया गया है… मेरी शक्तियां चुनाव आयोग को ट्रांसफर कर दी गई हैं. राज्य में ‘सुपर प्रेसिडेंट रूल’ (Super President’s Rule) चल रहा है.”
मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि उन्हें आधी रात को एक पत्रकार के जरिए इस बंधक संकट के बारे में पता चला. हालांकि, मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया पर स्थानीय लोगों के गुस्से को जायज ठहराते हुए उन्होंने कहा कि ‘मैं समझ सकती हूं कि लोग क्यों गुस्से में हैं.
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस घटना को न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देने वाला एक कदम बताया. सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह घटना न केवल न्यायिक अधिकारियों को धमकाने का एक खुला (brazen) प्रयास है, बल्कि इस अदालत के अधिकार को भी सीधे तौर पर चुनौती देती है.” अदालत ने घटना की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई (CBI) या राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से इसकी जांच कराने का आदेश दिया है.
आखिर मालदा की उस रात क्या हुआ था? (mamata banerjee political controversy)
मालदा में यह पूरा बवाल स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभ्यास के दौरान हुआ. आगामी विधानसभा चुनाव (23 अप्रैल से मतदान) से पहले चुनाव आयोग के आदेश पर बंगाल की मतदाता सूची में संशोधन किया जा रहा है. विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत जानबूझकर उनके समर्थक मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं.
बुधवार को मालदा में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के विरोध में एक बड़ी भीड़ जमा हो गई. हालात तब बेकाबू हो गए जब भीड़ ने 3 महिलाओं सहित 7 न्यायिक अधिकारियों को ब्लॉक ऑफिस के अंदर बंधक बना लिया. यह खौफनाक बंधक संकट लगातार 9 घंटे तक चला. रात करीब 1 बजे भारी पुलिस और अर्धसैनिक बलों के दखल के बाद अधिकारियों को वहां से सुरक्षित निकाला जा सका. इस दौरान गुस्साई भीड़ ने पुलिस और अधिकारियों की गाड़ियों पर जमकर पथराव किया, जिसमें कई गाड़ियों के शीशे टूट गए.
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