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‘पर्ची लाओ, तब लगाऊंगा ऑक्सीजन’, मंडला में एंबुलेंस बनी मौत की सवारी; ‘हत्या’ का जिम्मेदार कौन?

Mandla ambulance death: मध्य प्रदेश के मंडला जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था का जनाजा निकालती खबर सामने आई है. यहां 108 एंबुलेंस में ऑक्सीजन का सिलेंडर खाली होने से 21 वर्षीय डायलिसिस मरीज अजीत बरया की मौत हो गई. जानिए क्या है पूरा मामला?

Mandla ambulance death

Mandla ambulance death: मंडला/सुधीर उपाध्याय: मध्य प्रदेश के मंडला जिले की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं ने एक बार फिर एक बेकसूर की जान ले ली है. सुनहरा माल के रहने वाले 21 वर्षीय अजीत बरया के लिए सरकारी 108 एंबुलेंस जीवनदायिनी नहीं, बल्कि ‘मौत की सवारी’ साबित हुई. आरोप है कि एंबुलेंस स्टाफ की मनमानी और रास्ते में ऑक्सीजन खत्म होने के कारण किडनी की बीमारी से जूझ रहे इस युवक ने तड़प-तड़प कर अपने पिता के सामने ही दम तोड़ दिया.

‘पर्ची लाओ, तब लगाऊंगा ऑक्सीजन’ (Oxygen finished in 108 ambulanc In Mandla)

मृतक के पिता अमन बरया का दर्द सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए. उनका आरोप है कि बेटे की तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने अस्पताल से डायलिसिस का समय बदलने की गुहार लगाई, जिसे अनसुना कर दिया गया. जब उन्होंने 108 एंबुलेंस बुलाई, तो वह पूरे एक घंटे की देरी से पहुंची. हद तो तब हो गई जब एंबुलेंस में मौजूद कर्मी ने ‘डॉक्टर की अनुमति’ के बिना मरीज को ऑक्सीजन लगाने से ही साफ इनकार कर दिया और मरीज को सीधे जिला अस्पताल ले जाने की बजाय बम्हनी स्वास्थ्य केंद्र ले गया.

3-4 किलोमीटर चलते ही खत्म हुई गैस (health system negligence Mandla)

बम्हनी पहुंचने पर वहां के डॉक्टर ने हालत गंभीर देख तुरंत ऑक्सीजन लगाने के निर्देश दिए और मरीज को जिला अस्पताल रेफर कर दिया. लेकिन बदइंतजामी का आलम देखिए, एंबुलेंस मंडला के लिए निकली ही थी कि महज 3 से 4 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद सिलेंडर की ऑक्सीजन गैस खत्म हो गई. ऑक्सीजन छिनते ही अजीत की सांसें उखड़ने लगीं और जिला अस्पताल की दहलीज तक पहुंचने से पहले ही उसने इस दुनिया को अलविदा कह दिया.

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मौन साधे बैठे अधिकारी, कौन लेगा जिम्मेदारी? (Mandla district hospital news)

यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि सिस्टम के मुंह पर एक करारा तमाचा है. जब इस दर्दनाक घटना पर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो सभी कैमरे से बचते और एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते नजर आए. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 21 साल के जवान बेटे की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है? क्या स्वास्थ्य विभाग इस ‘लापरवाही’ पर कोई सख्त एक्शन लेगा, या फाइलें फिर से ठंडे बस्ते में डाल दी जाएंगी?



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