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पुलिस भर्ती या फर्जीवाड़े का अड्डा? ‘विशेष सहयोगी दस्ता’ भर्ती में पकड़े गए फर्जी जवान, सिस्टम पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के मंडला जिले में ‘विशेष सहयोगी दस्ता’ भर्ती के दौरान फर्जी मार्कशीट के जरिए पुलिस में भर्ती होने की कोशिश का खुलासा हुआ है.

रिपोर्ट-मुकेश बैरागी


मध्य प्रदेश के मंडला जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया हैं. यहां देश की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश की गई, वो भी फर्जी दस्तावेजों के जरिए. मामला ‘विशेष सहयोगी दस्ता’ भर्ती अभियान से जुड़ा है, जिसमें कुछ युवाओं ने शॉर्टकट अपनाते हुए फर्जी मार्कशीट के दम पर पुलिस की वर्दी हासिल करने की कोशिश की.

क्या है पूरा मामला?

साल 2025 में मंडला पुलिस ने नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ‘विशेष सहयोगी दस्ता’ के तहत भर्ती निकाली थी. मकसद था स्थानीय युवाओं को रोजगार देना और नक्सल मोर्चे पर मदद लेना. भर्ती प्रक्रिया पूरी हुई, युवाओं का चयन भी हो गया, लेकिन जब बारी आई कागजों की बारीकी से जांच की, तो परतें खुलने लगीं.

जांच के दौरान पुलिस को शक हुआ कि कुछ अभ्यर्थियों की मार्कशीट असली नहीं हैं. जब इन दस्तावेजों की गहराई से पड़ताल की गई, तो पता चला कि ‘ग्रेट मदर इंडिया स्कूल, मवई’ नामक एक संस्थान ने कुछ अभ्यर्थियों को फर्जी मार्कशीट थमा दी थी.

प्रशासन की कार्रवाई और पुलिस का एक्शन

इस फर्जीवाड़े की गूंज मिलते ही बिछिया एसडीएम के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम बनाई गई. एसडीओपी बिछिया सौरव तिवारी ने बताया कि जांच में स्कूल की भूमिका संदिग्ध पाई गई है. मवई थाने में आरोपियों के खिलाफ मामला तो दर्ज कर लिया गया है, लेकिन फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं.

वहीं, जिला परियोजना समन्वयक (DPC) कुलदीप कठल ने इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि स्कूल की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए उसकी मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. उच्च अधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखा गया है और जल्द ही इस पर कड़ा फैसला लिया जा सकता है.

इस पूरी खबर का सबसे चौंकाने वाला पहलू कुछ और ही है. चर्चा है कि जांच टीम को एक दर्जन से भी अधिक फर्जी मार्कशीट मिली थीं, लेकिन एफआईआर केवल चार लोगों पर ही दर्ज की गई. अब आम जनता और जानकार यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर बाकी लोगों को क्यों छोड़ा गया?

  • क्या बाकी मामलों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?
  • क्या जांच टीम की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजमी है?
  • क्या इस खेल के पीछे कोई बड़ा गिरोह काम कर रहा है?

फिलहाल, मंडला पुलिस के लिए यह साख का सवाल बन गया है. देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस फर्जीवाड़े की जड़ तक जाकर उन सभी चेहरों को बेनकाब करता है जिन्होंने सरकारी तंत्र की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की, या फिर यह मामला भी चंद गिरफ्तारियों के बाद फाइलों में दबकर रह जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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