प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ के 130वें एपिसोड में देश के एक ऐसे अनोखे गांव की कहानी सुनाई, जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया. मीडिया की चकाचौंध से दूर, गुजरात के बेचराजी का चंदनकी गांव (Chandanki Village) एकता और भाईचारे की एक ऐसी मिसाल पेश कर रहा है, जो शायद ही कहीं और देखने को मिले. पीएम मोदी ने बताया कि इस गांव के किसी भी घर में खाना नहीं बनता. जी हां, यहां हर घर में किचन तो है, लेकिन उसमें खाना नहीं पकता.
पूरा गांव एक परिवार (Unique Community Kitchen)
पीएम मोदी ने बताया कि चंदनकी गांव में एक ‘कम्युनिटी किचन’ (सामुदायिक रसोई) है, जहां पूरे गांव का खाना एक साथ बनता है. गांव का हर व्यक्ति, चाहे वो बच्चा हो या बुजुर्ग, इसी कॉमन किचन में बना खाना खाता है. लोग एक साथ पंगत में बैठकर भोजन करते हैं. यह परंपरा महज़ पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और एकजुटता का एक अद्भुत उदाहरण है.
बुजुर्गों के लिए ‘वरदान’ 915 Years of Tradition)
हैरानी की बात यह है कि यह व्यवस्था कोई एक-दो दिन की नहीं, बल्कि पिछले 15 सालों से लगातार चल रही है. पीएम मोदी ने कहा कि यह पहल बुजुर्गों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिन्हें अब बुढ़ापे में खाना बनाने की चिंता नहीं करनी पड़ती. अगर कोई बीमार है या बुजुर्ग कम्युनिटी किचन तक आने में असमर्थ है, तो गांव वाले उनके लिए टिफिन सर्विस (होम डिलीवरी) का भी इंतजाम करते हैं.
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‘असली ताकत यही है’ (Hidden Gem of India)
पीएम मोदी ने कहा, “भारत के हर हिस्से में कुछ न कुछ अद्भुत है जो अक्सर मीडिया में नहीं दिखता. लेकिन यही हमारी असली ताकत है.” चंदनकी गांव की यह पहल बताती है कि कैसे एक समाज एक बड़े परिवार की तरह रह सकता है, जहां लोग सिर्फ भोजन ही नहीं, बल्कि सुख-दुख और अपनापन भी बांटते हैं.
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