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देश छोड़कर भाग रहा था ₹3558 करोड़ के घोटाले का मास्टरमाइंड, ED ने किया नाकाम, जानें कैसे हत्‍थे चढ़ा

ED Action Today: देश छोड़कर भाग रहे ₹3558 करोड़ के घोटाले के मास्टरमाइंड सुखविंदर सिंह खरूर को ED ने दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया, यह घोटाला ‘Cloud Particle Scam’ के नाम से जाना जा रहा है.

Enforcement Directorate.(Facebook)

ईडी.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Scam Busted by ED: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 3558 करोड़ रुपये के घोटाले के मास्टरमाइंड सुखविंदर सिंह खरूर और उसकी पत्नी डिंपल खरूर को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) से गिरफ्तार किया है. दोनों आरोपी देश छोड़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन लुक आउट सर्कुलर (LoC) के कारण उन्हें एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार कर लिया गया. इस गिरफ्तारी के बाद, जालंधर की एक अदालत ने उन्हें ईडी की हिरासत में भेज दिया है, जहां उनसे आगे की जांच के लिए पूछताछ की जा रही है.

Cloud Particle Scam का खुलासा

यह घोटाला ‘Cloud Particle Scam’ के नाम से सामने आया है, जिसमें निवेशकों को ‘सेल एंड लीज-बैक’ (SLB) मॉडल के तहत ठगा गया. इस घोटाले के तहत, निवेशकों से फर्जी तरीके से बड़ी राशि जुटाई गई और उन्हें दिखाया गया कि वे क्लाउड पार्टिकल टेक्नोलॉजी में निवेश कर रहे हैं.

ईडी की जांच के अनुसार, व्यूनाउ ग्रुप के सीईओ और संस्थापक सुखविंदर सिंह खरूर ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया. जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि इस योजना के तहत निवेशकों से लगभग ₹3558 करोड़ की राशि एकत्रित की गई थी, जबकि इस टेक्नोलॉजी का कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं था.

धोखाधड़ी, निवेशकों को गुमराह करना

सुखविंदर सिंह खरूर और उनकी कंपनी ने निवेशकों को क्लाउड पार्टिकल टेक्नोलॉजी का झूठा वादा किया था. इसके तहत, निवेशकों से एक तय राशि लेकर उन्हें यह दिखाया गया कि यह एक उभरता हुआ और लाभकारी कारोबार है. हालांकि, असल में यह पूरी योजना एक धोखाधड़ी थी, और धन का इस्तेमाल किसी व्यावसायिक कार्य में नहीं हुआ. ईडी के अधिकारियों ने बताया कि यह राशि गैर-व्यावसायिक कार्यों में खर्च की गई.

क्या है सेल एंड लीज-बैक (SLB) मॉडल?

‘सेल एंड लीज-बैक’ (SLB) मॉडल के तहत, निवेशक किसी कंपनी को अपना सामान बेचकर उसे लीज़ पर वापस ले लेते हैं. इस मॉडल को इस घोटाले में निवेशकों को झांसा देने के लिए इस्तेमाल किया गया था. यह तरीका तकनीकी रूप से सही लग सकता था, लेकिन असल में यह निवेशकों को भ्रमित करने का एक तरीका था.

आखिरकार, कैसे हुआ खुलासा?

ईडी ने इस घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए विभिन्न जांचों के माध्यम से जानकारी जुटाई और उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी के बाद अपनी जांच शुरू की थी. एजेंसी के प्रयासों से यह मामला सामने आया और अब आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है.

इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद, यह साबित हो गया है कि धोखाधड़ी करने वाले लोग किसी भी रूप में निवेशकों को ठगने से पीछे नहीं हटते. ईडी द्वारा की गई कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के खिलाफ एजेंसियां सख्त हैं और ऐसे मामलों में दोषियों को सजा दिलवाने के लिए पूरी कोशिश कर रही हैं.

  • भारत एक्सप्रेस


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