विदेश मंत्रालय (MEA) ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि विदेशी अंशदान नियमन कानून (FCRA) संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने में अमेरिका का दबाव था. अपनी साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ कहा कि संसद में किसी बिल को पेश करना या उसे समिति के पास भेजना भारत का पूरी तरह से आंतरिक और विधायी मामला है.
बाहरी दबाव में काम नहीं करता भारत
गौर करने वाली बात है कि FCRA संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष संसद में लगातार हंगामा और इसे वापस लेने की मांग कर रहा था. इसके बाद 12 अगस्त को लोकसभा ने इस बिल को 31 सदस्यीय JPC के पास गहन समीक्षा के लिए भेज दिया था. अमेरिका के दखल की अफवाहों पर विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया कि भारत किसी भी बाहरी दबाव में काम नहीं करता.
बांग्लादेश ने की डीजजल की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बांग्लादेश द्वारा भारत से डीजल मांगे जाने के सवाल पर भी विदेश मंत्रालय ने रुख साफ किया. MEA ने कहा कि भारत अपनी घरेलू जरूरत, ईंधन की उपलब्धता और रिफाइनिंग क्षमता का आकलन करने के बाद ही बांग्लादेश की इस मांग पर कोई फैसला लेगा.
वहीं, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री रहमान को दिए गए भारत दौरे के न्यौते पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद और द्विपक्षीय बातचीत के रास्ते हमेशा खुले हैं.
सिंधु जल संधि पर भारत का स्टैंड
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है और हमारी नीति पहले जैसी ही कायम है.
वहीं, अफगानिस्तान को लेकर रणधीर जायसवाल ने कहा कि पिछले एक-डेढ़ साल में दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई है. अफगानिस्तान से लगातार भारत दौरे हुए हैं, जिससे व्यापार, कनेक्टिविटी और विकास कार्यों में दोनों देशों के संबंध और मजबूत हुए हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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