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आधी रात को ‘मनरेगा’ बना ‘VB–G RAM G’, विरोध के बीच राज्यसभा में बिल पास

Parliament Updates: लोकसभा में पास होने के बाद भारी विरोध के बीच ‘VB–G RAM G’ बिल राज्यसभा में भी पास हो गया है. इस तरह से आधी रात को ‘मननरेगा’ बना ‘VB–G RAM G’ बन गया. अब इसपर राष्ट्रपति के साइन होने बाकी हैं.

MNREGA Became VB GRAM G Bill Passed In Rajya Sabha Amidst Protests At midnight

‘VB–G RAM G’ Parliament Updates: संसद ने गुरुवार को भारी विरोध और हंगामे के बीच ‘विकसित भारत गारंटी फॉर एंप्लॉयमेंट एंड लाइवलीहुड मिशन (रूरल) बिल’ यानी ‘वीबी जीराम-जी’ (GRAM G) को मंजूरी दे दी. लोकसभा के बाद भारी हंगामें के बीच यह नया कानून राज्यसभा में भी पास हो गया. सदन ने इसे रात करीब 12:30 बजे ध्वनी मत से पास किया जो पिछले दो दशकों से चल रही मनरेगा (MGNREGA) योजना की जगह लेगा. नए कानून के तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों में साल में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाएगी.

संसद में क्या हुआ?

  • लोकसभा से पास होने के कुछ घंटों बाद, राज्यसभा में देर रात ध्वनि मत से इस बिल को पारित कर दिया गया.
  • दोनों सदनों में विपक्ष ने इसका तीखा विरोध किया. राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने बिल की कॉपियां फाड़ीं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.
  • हंगामे के बीच सभापति सीपी राधाकृष्णन को विपक्षी सदस्यों को चेतावनी देनी पड़ी कि वे सत्ता पक्ष की बेंचों के करीब न आएं.

विपक्ष का विरोध क्यों?

बिल पास होने के बाद विपक्ष ने ‘संविधान सदन’ के बाहर धरना दिया और देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने 12 घंटे का विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया.

  • महात्मा गांधी का नाम हटाया: विपक्ष ने योजना के नाम से ‘महात्मा गांधी’ को हटाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई.
  • राज्यों पर बोझ: विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार इस योजना का वित्तीय बोझ राज्यों पर डाल रही है.
  • जांच की मांग: विपक्षी दल चाहते थे कि बिल को विस्तृत जांच के लिए संसद की स्थायी समिति (Standing Committee) के पास भेजा जाए.

सरकार और मंत्री शिवराज का जवाब

ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में 5 घंटे चली बहस का जवाब देते हुए बिल का बचाव किया. चौहान ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस ने महात्मा गांधी के नाम का इस्तेमाल केवल राजनीतिक फायदे के लिए किया, जबकि उनके आदर्शों की हत्या की (आपातकाल और घोटालों का हवाला देते हुए). उन्होंने कहा कि मूल योजना 2005 में शुरू हुई थी और गांधीजी का नाम 2009 में केवल चुनाव के लिए जोड़ा गया था.

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मंत्री ने कहा कि पुरानी योजना में कई खामियां थीं और यूपीए के दौर में मनरेगा भ्रष्टाचार से ग्रस्त थी. यह नया बिल उन ढांचागत कमियों को दूर करने के लिए है. उन्होंने कहा कि यह बिल रोजगार के अवसर बढ़ाने और ग्रामीण भारत के विकास के लिए जरूरी है. सरकार का लक्ष्य जल संरक्षण और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर 10-11 लाख करोड़ रुपये खर्च करना है.



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