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वायरल हो रही राफेल सौदे की चिट्ठी में क्या है? जानें पोस्ट की सच्चाई

फ्रांस से राफेल खरीदने के बाद भारत में सोशल मीडिया पर काफी खुशी देखने को मिली थी. यह पहली बार था जब राफेल सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर एक चर्चा का विषय बन चुका था.

फ्रांस से राफेल (Rafel) खरीदने के बाद भारत में सोशल मीडिया पर काफी खुशी देखने को मिली थी. यह पहली बार था जब राफेल सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर एक चर्चा का विषय बन चुका था. इस बीच एक बार फिर ऐसा हो रहा है, जहां इसको लेकर एक बड़ा दावा भी किया जा रहा है. आइए जानते है क्या है दावा और उसके पीछे की पूरी सच्चाई.

क्या हुआ वायरल?

दरअसल, सोशल मीडिया पर राफेल विमान के सौदे को लेकर एक बड़ा दावा किया जा रहा है. दावे में बताया जा रहा है कि भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत में फ्रांस के राजदूत थियरी माथू को एक गोपनीय पत्र लिखा था, जो लीक हो गया. इस पत्र में नौसेना के लिए राफेल विमानों की डिलीवरी से जुड़ी समय-सीमा मीडिया में सामने आने को लेकर चिंता जताए जाने की बात कही जा रही है.

इस पत्र के स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए एक एक्स यूजर ने लिखा है जयशंकर द्वारा फ्रांस को लिखे गए पत्र से एक बात साफ हो जाती है कि राफेल विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है. नई दिल्ली लीक हुए कम्यूनिकेशन के असर को संभालने के लिए जूझ रही है.

जांच में आया सच

इतने बड़े दावे के साथ वायरल होने पर हमारी भारत एक्सप्रेस की फैक्ट चेक टीम ने इसकी पड़ताल शुरू की. जांच शुरू करने से पहले ही पत्र को देखने पर इसकी भाषा, स्वरूप और लेटरहेड कहीं से भी विदेश मंत्री की लिखी हुई आधिकारिक चिट्ठी जैसी नहीं लगती है.

जांच में सबसे पहले हमने S Jaishankar letter कीवर्ड  का इस्तेमाल करते हुए खोजबीन की, जिसमें हमें एक यूजर द्वारा शेयर की गई चिट्ठी मिलती है. इस चिट्ठी को शख्स ने एस जयशंकर की तरफ से उनकी पुनर्नियुक्ति पर मिली आधिकारिक पत्र के रूप में शेयर किया था. इस ऑफिसियल लेटर में भारत सरकार के आधिकारिक अशोक स्तंभ चिन्ह के साथ एस जयशंकर का हस्ताक्षर भी था.

जब इस असली लेटर को हमने वायरल हो रहे लेटर की स्क्रीनशॉट से कंपेयर किया, तो दोनों में अंतर दिखाई दिया. इसके अलावा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन को लिखे गए एक अन्य आधिकारिक पत्र की प्रति भी मिली. इसमें भी अशोक स्तंभ के साथ-साथ उनके हस्ताक्षर भी मौजूद हैं.

वहीं, इस दावे को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल की भी जांच की गई.

इसमें हमें मंत्रालय के फैक्ट चेक हैंडल द्वारा एक पोस्ट मिला जिसमें वायरल  चिट्ठी को फर्जी बताया गया है.

कहां से वायरल हो रही चिट्ठी?

जांच के दौरान ये भी सामने आया कि इस फर्जी चिट्ठी को शेयर करने वाला सोशल मीडिया हैंडल पाकिस्तान से संचालित किया जा रहा है. झूठे दावे के साथ चिट्ठी को शेयर करने वाला अकाउंट अप्रैल 2025 से बनाया गया था और उसी समय इसके यूजरनेम को बदला गया था.

इससे जांच से ये बात साफ हो जाती है कि वायरल दावा झूठा और भ्रामक है. इसे पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल द्वारा  केवल प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. इसलिए ऐसी किसी भी दावे पर विश्वास करने से पहले उसकी जांच जरूर करें.

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-भारत एक्सप्रेस 



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