प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने देश के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा निर्णय लिया है. बुधवार को हुई कैबिनेट की अहम बैठक में ओडिशा और झारखंड के चार जिलों को जोड़ने वाली 3,907 करोड़ रुपये की लागत वाली दो मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी गई है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 145 किलोमीटर का नया विस्तार किया जाएगा.
परिचालन क्षमता में सुधार और 1,526 गांवों को कनेक्टिविटी
कैबिनेट के आधिकारिक बयान के अनुसार, इन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं के पूरा होने से रेलवे लाइन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. इससे ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम बनेगी और भारतीय रेलवे की परिचालन क्षमता के साथ-साथ उसकी सेवा विश्वसनीयता में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस कदम से दोनों राज्यों के लगभग 1,526 गांवों को बेहतर रेल संपर्क (कनेक्टिविटी) हासिल होगी, जिससे सीधे तौर पर करीब 14 लाख की ग्रामीण आबादी लाभान्वित होगी.
पर्यटन और खनिज परिवहन को मिलेगा जबरदस्त बढ़ावा
यह नई रेल लाइन देश के कई प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच को बेहद आसान बना देगी. इनमें ललितगिरि बौद्ध परिसर, प्रसिद्ध श्री बालदेवज्यू मंदिर और मेघाहातुबुरु हिल्स जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल हैं. इसके अलावा, आर्थिक दृष्टिकोण से भी ये रेल मार्ग बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये क्षेत्र कोयला, लौह अयस्क (आयरन ओर), डोलोमाइट, चूना पत्थर (लाइमस्टोन) और जिप्सम जैसी महत्वपूर्ण खनिज एवं औद्योगिक वस्तुओं के परिवहन के प्रमुख केंद्र हैं. इस परियोजना के लागू होने के बाद रेलवे की माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी और हर साल अतिरिक्त 44 मिलियन टन (एमटीपीए) माल का परिवहन संभव हो सकेगा.
पर्यावरण संरक्षण और तेल की भारी बचत
पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई ये परियोजनाएं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं. रेलवे को एक ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल माध्यम बताते हुए सरकार ने कहा कि इन परियोजनाओं से देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी. इससे लॉजिस्टिक्स लागत तो कम होगी ही, साथ ही हर साल लगभग 6 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी. इसके अलावा, 29 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के उत्सर्जन में कमी आएगी, जो कि पर्यावरण के लिहाज से लगभग 1 करोड़ पेड़ लगाने से मिलने वाले लाभ के बराबर है.
कैबिनेट के मुताबिक, यह पूरी पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यू इंडिया’ और ‘विकसित भारत’ के विजन के बिल्कुल अनुरूप है, जो न केवल इन क्षेत्रों में भीड़भाड़ को कम करेगी बल्कि व्यापक विकास के जरिए स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के ढेरों नए अवसर भी पैदा करेगी.
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