मोदी कैबिने बड़े बदलाव की तैयारी!
Modi Cabinet Reshuffle: बीजेपी संगठन में नई टीम के गठन के बाद अब मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की चर्चा तेज़ हो गई है. पार्टी के भीतर और सियासी गलियारों में यह माना जा रहा है कि इस बार मंत्रिमंडल में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं. कई वरिष्ठ नेताओं की विदाई तय मानी जा रही है, वहीं 16 से 17 नए और युवा चेहरों को मंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है.
संगठन से मंत्रिमंडल तक बदलाव की लहर
बीजेपी ने हाल ही में संगठन में फेरबदल किया है और अब मंत्रिमंडल में भी इसी तरह की ओवरहॉलिंग की तैयारी है. सूत्रों के मुताबिक, इस बार परफॉर्मेंस ही मंत्रियों के भविष्य का पैमाना होगा. पीएम मोदी ने हाल की कैबिनेट बैठक में साफ कहा था कि मंत्री सिर्फ दफ्तर तक सीमित न रहें, बल्कि ग्राउंड पर जाकर जनता से जुड़ें.
अश्विनी वैष्णव को मिल सकता है प्रमोशन
चर्चा है कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को टॉप फाइव मंत्रियों में जगह मिल सकती है. उनके पास रेलवे, सूचना एवं प्रसारण और आईटी जैसे तीन बड़े मंत्रालय हैं. उनके कामकाज को लेकर सकारात्मक राय है और माना जा रहा है कि उन्हें और बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है.
नितिन गडकरी का मंत्रालय बदले जाने की अटकल
नितिन गडकरी को लेकर भी सियासी गलियारों में चर्चा है. कहा जा रहा है कि उनके मंत्रालय में फेरबदल हो सकता है. गडकरी ने हाल ही में युवाओं को आगे लाने की बात कही थी, जिससे संकेत मिलता है कि उनके मंत्रालय का भार किसी और को सौंपा जा सकता है. हालांकि, उनके सहज और संतुलित बयान यह भी दिखाते हैं कि वह खुद पद छोड़ने की बात नहीं कर रहे.
शिक्षा मंत्रालय में बदलाव की संभावना
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. यह मंत्रालय सीधे Gen-Z और युवाओं से जुड़ा हुआ है. ऐसे में माना जा रहा है कि यहां भी स्थायी बदलाव होगा. कई मंत्रियों के पास तीन-चार मंत्रालय हैं, जिनमें से कुछ विभाग नए चेहरों को दिए जा सकते हैं.
खाली पदों पर नए चेहरों की एंट्री
फिलहाल मोदी कैबिनेट में 69 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम संख्या 81 हो सकती है. यानी 12 पद खाली हैं. इन खाली पदों पर नए और युवा नेताओं को जगह देने की तैयारी है. बीजेपी सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व देने पर विचार कर रही है.
चुनावी समीकरणों पर फोकस
बीजेपी जानती है कि 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 का लोकसभा चुनाव बेहद अहम हैं. उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में चुनावी लड़ाई आसान नहीं होगी. ऐसे में कैबिनेट विस्तार के जरिए पार्टी सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश करेगी.
विपक्ष की पैनी नजर
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी इस फेरबदल पर नजर रखे हुए हैं. विपक्ष यह देखना चाहता है कि कैबिनेट में महिलाओं, युवाओं और चुनावी राज्यों को कितना प्रतिनिधित्व दिया जाता है. अगर बीजेपी इस संतुलन में चूक करती है तो विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना सकता है.
सितंबर-अक्टूबर में विस्तार की संभावना
बीजेपी के भीतर चर्चा है कि कैबिनेट विस्तार सितंबर या अक्टूबर में हो सकता है. जन्माष्टमी के बाद इसकी संभावना ज्यादा बताई जा रही है. पार्टी के अंदर यह भी माना जा रहा है कि इस बार का विस्तार बेहद चौंकाने वाला होगा. कई पुराने चेहरे हट सकते हैं और नए चेहरों को मौका मिलेगा.
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बड़े बदलाव की तैयारी
बीजेपी इस बार किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहती. पार्टी को याद है कि ‘शाइनिंग इंडिया’ अभियान के दौरान जनता से जुड़ाव की कमी ने नुकसान पहुंचाया था. इसलिए इस बार मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बेहद रणनीतिक तैयारी की जा रही है.
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