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West Asia Crisis पर मोदी सरकार के मंत्रियों की मीटिंग, समस्या से निपटने के लिए उठाए जाएंगे ये कदम

ईरान और अमेरिका ने फिलहाल संघर्ष विराम की घोषणा कर रखी है. हालांकि तेल और गैस की आवश्यक सप्लाई का सबसे बड़ा जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज अभी भी प्रभावित है. भारत सरकार ने इस पर नजर बना रखी है

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

पश्चिम एशिया में चल रही तनावपूर्ण स्थिति पर केंद्र सरकार नजर बनाए हुए है और हर संभावित स्थिति से निपटने के लिए सतर्कता बरती जा रही है. इसी क्रम में शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई. यह पश्चिम एशिया की स्थिति पर अनौपचारिक मंत्री समूह की चौथी बैठक थी.

इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की. बैठक के बाद रक्षा मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी प्रकार की संभावित समस्या से निपटने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है.

बैठक में ये मंत्री शामिल हुए

इस उच्चस्तरीय बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया, केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल सहित कई अन्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. पश्चिम एशिया की स्थिति का भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई.

गौरतलब है कि फिलहाल ईरान और अमेरिका ने संघर्ष विराम की घोषणा कर रखी है. हालांकि तेल और गैस की आवश्यक सप्लाई का सबसे बड़ा जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज अभी भी प्रभावित है. इस बीच विशेष रूप से प्रभावित इलाकों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, ऊर्जा से जुड़े मुद्दे और आर्थिक गतिविधियों पर असर जैसे विषयों पर इस बैठक में विचार किया गया. पूर्व में सरकार ने कई देशों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए भी सभी जरूरी प्रबंध किए थे.

आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई

मौजूदा स्थिति के मद्देनजर विभिन्न मंत्रालय और एजेंसियां पूरी तरह सतर्कता बरत रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके. विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जा रहा है, जिससे किसी भी संकट की स्थिति में तेजी से निर्णय लिए जा सकें.

इससे पहले, 8 अप्रैल को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में अनौपचारिक मंत्री समूह की तीसरी बैठक आयोजित की गई थी. उस बैठक में भी क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और उसके भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की विस्तृत समीक्षा की गई.

बैठक के दौरान रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया था कि सरकार देश के भीतर आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है.

रक्षामंत्री का कहना था कि कहा कि रसोई गैस (एलपीजी), पेट्रोल, डीजल और किसानों के लिए उर्वरकों की आपूर्ति लगातार बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसके साथ ही देशभर में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई को सुचारु रखने के लिए प्रभावी व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े. उन्होंने यह भी बताया था कि सरकार संभावित संकटों से निपटने के लिए पहले से ही तैयारियों को मजबूत कर रही है. उनका कहना था कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सतत निगरानी और समयानुसार निर्णय लेना बेहद जरूरी है.

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