समुद्र के नीचे छिपी इंटरनेट की रीढ़
आजकल हम इंटरनेट का इस्तेमाल इतना करते हैं कि सोच भी नहीं सकते कि यह कैसे काम करता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया का ज्यादातर इंटरनेट समुद्र के नीचे बिछी पतली केबल्स से चलता है? इन केबल्स को ऑप्टिकल फाइबर केबल कहा जाता है. ये केबल्स इतनी मजबूत होती हैं कि हजारों किलोमीटर दूर तक बिना रुके डेटा पहुंचाती हैं. लेकिन अभी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चल रहे तनाव के कारण इन केबल्स को नुकसान पहुंचने का खतरा है. अगर ऐसा हुआ तो भारत समेत पूरी दुनिया में इंटरनेट धीमा पड़ सकता है.
समुद्र में नीचे बिछी हैं इंटरनेट की केबल्स
आप सोच रहे होंगे कि इंटरनेट तो सैटेलाइट से चलता होगा. लेकिन सच यह है कि दुनिया का 97% डेटा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स से ही ट्रांसफर होता है. ये केबल्स इतनी पतली होती हैं जितनी आपकी उंगली की मोटाई. एक केबल में कई छोटी-छोटी फाइबर होती हैं जो प्रकाश की मदद से डेटा भेजती हैं.
ये केबल्स समुद्र की गहराई में दबाई जाती हैं ताकि कोई नुकसान न पहुंचे. दुनिया भर में 450 से ज्यादा ऐसी केबल सिस्टम बिछी हुई हैं. इनकी कुल लंबाई 13 लाख किलोमीटर से भी ज्यादा है. ये केबल्स महाद्वीपों को एक-दूसरे से जोड़ती हैं और इंटरनेट को तेज बनाती हैं.

ऑप्टिकल फाइबर केबल अंदर से कैसी होती है?
ऑप्टिकल फाइबर केबल कई परतों से बनी होती है. सबसे बाहर पॉलीइथाइलीन की मजबूत परत होती है जो पानी से बचाती है. उसके अंदर स्टील का वायर आर्मर लगाया जाता है जो केबल को टूटने से बचाता है.
फिर इंसुलेशन मैट्रिक्स आता है जो सिग्नल को गड़बड़ होने से बचाता है. पावर ट्रांसमिशन कंडक्टर बिजली पहुंचाता है. इंसुलेशन लेयर शॉर्ट सर्किट से बचाती है. और सबसे अंदर ऑप्टिकल फाइबर होती हैं जो असल में इंटरनेट डेटा ट्रांसफर करती हैं.
ये केबल्स इतनी सावधानी से बनाई जाती हैं कि समुद्र की गहराई में भी कई साल तक ठीक काम करती रहें.
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है डिजिटल चोकपॉइंट?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का बहुत महत्वपूर्ण इलाका है. यहां से दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल और 25 प्रतिशत एलएनजी गुजरता है. लेकिन सिर्फ तेल ही नहीं, इस रास्ते के नीचे इंटरनेट की कई महत्वपूर्ण केबल्स भी बिछी हुई हैं.
भारत को यूरोप, अफ्रीका और पश्चिम एशिया से जोड़ने वाली मुख्य केबल्स जैसे SEA-ME-WE, AAE-1 और EIG इसी रूट के पास से गुजरती हैं. अगर इन केबल्स को कोई नुकसान पहुंचता है तो भारत का इंटरनेट सीधे प्रभावित होगा.
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से इस क्षेत्र में खतरा बढ़ गया है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि होर्मुज सिर्फ एनर्जी चोकपॉइंट नहीं बल्कि डिजिटल चोकपॉइंट भी बन गया है.

भारत के लिए क्यों बड़ा खतरा?
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था इन समुद्री केबल्स पर बहुत निर्भर है. हमारा ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट बैंडविड्थ अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र से होकर आता है. अगर होर्मुज में केबल्स क्षतिग्रस्त हुईं तो ट्रैफिक को दूसरे लंबे रास्ते पर भेजना पड़ेगा. इससे लेटेंसी बढ़ जाएगी यानी डेटा पहुंचने में ज्यादा समय लगेगा. यूट्यूब, इंस्टाग्राम, नेटफ्लिक्स जैसी सेवाओं में वीडियो अटकने लगेगा. वीडियो कॉल में आवाज और तस्वीर में दिक्कत आएगी. क्लाउड सेवाएं भी धीमी पड़ सकती हैं.
भारत का आईटी और आउटसोर्सिंग सेक्टर करीब 250 बिलियन डॉलर यानी 23.48 लाख करोड़ रुपये का है. यह सेक्टर अमेरिकी और यूरोपीय क्लाइंट्स के साथ रीयल टाइम कनेक्टिविटी पर चलता है. अगर केबल्स कट गईं तो कंपनियों को भारी नुकसान हो सकता है. सर्विस एग्रीमेंट्स टूट सकते हैं और पेनाल्टी लग सकती है.
खाड़ी देशों से आने वाली रेमिटेंस और बैंकिंग ट्रांजेक्शन जैसे स्विफ्ट भी धीमे हो सकते हैं. आम लोगों को भी रोजमर्रा की ऑनलाइन सेवाओं में परेशानी होगी.
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क्या इंटरनेट पूरी तरह बंद हो जाएगा?
नहीं. इंटरनेट का सिस्टम इस तरह बनाया गया है कि एक रास्ता बंद होने पर डेटा दूसरे रास्ते पर चला जाता है. इसलिए पूरी तरह इंटरनेट बंद होने की संभावना कम है. लेकिन री-रूटिंग से वैकल्पिक रास्तों पर बोझ बढ़ जाएगा.
इससे इंटरनेट की स्पीड बहुत कम हो सकती है. शेयर बाजार और हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग जैसे क्षेत्र जहां हर मिलीसेकंड मायने रखता है, वहां बड़ा वित्तीय जोखिम पैदा हो सकता है.
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भारत वैकल्पिक रास्तों पर कर रहा निवेश
इस खतरे को देखते हुए भारत और कई दूसरे देश अब वैकल्पिक रास्तों पर काम कर रहे हैं. इलॉन मस्क की स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं बैकअप के रूप में देखी जा रही हैं. भविष्य में ऐसी नई केबल्स बिछाने की योजना है जो संवेदनशील इलाकों को बायपास कर सकें. इससे भू-राजनीतिक तनाव का असर कम हो सकेगा.
फिलहाल, होर्मुज में बढ़ता तनाव सिर्फ तेल की कीमतें नहीं बढ़ा रहा बल्कि पूरी डिजिटल दुनिया की चिंता भी बढ़ा रहा है. हमें समझना चाहिए कि हमारा इंटरनेट कितना नाजुक है और समुद्र के नीचे बिछी ये पतली केबल्स कितनी महत्वपूर्ण हैं.
– भारत एक्सप्रेस
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