सांकेतिक तस्वीर.
MP News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में एक रिटायर्ड शिक्षक की न्याय के लिए संघर्ष की अनोखी कहानी सामने आई है. डबरा अनुभाग के ग्राम गतारी निवासी पूरन सिंह जाट, जो ट्रिपल MA और LLB डिग्रीधारी हैं, 2024 में माध्यमिक शिक्षक पद से रिटायर हो चुके हैं. लेकिन, रिटायरमेंट के बाद उन्हें शासन से मिलने वाली सुविधाओं से वंचित कर दिया गया है.
अपने अधिकारों के लिए दर-दर भटक रहे शिक्षक
पूरन सिंह जाट ने 1998 में शिक्षा कर्मी के रूप में स्कूल शिक्षा विभाग में अपनी सेवा शुरू की थी. 21 जुलाई 2024 को उन्होंने ग्वालियर जिले के गड़ी पिछोर माध्यमिक विद्यालय में अंतिम सेवाएं दीं और सेवानिवृत्त हो गए. लेकिन एनपीएस के बकाया 20 लाख रुपये, ग्रेच्युटी के 15 हजार, द्वितीय क्रमोन्नति एरियर के लगभग 1 लाख और जनवरी 2024 से जुलाई 2024 तक 7% एरियर के 25 हजार रुपये उन्हें अब तक नहीं मिले हैं.
उन्होंने संकुल कार्यालय, जिला कलेक्टर की जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन समेत विभिन्न विभागों में अब तक 119 आवेदन दे चुके हैं. बावजूद इसके, उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है और अधिकारी उनके आवेदन को टालते जा रहे हैं.
“मुझे नाजायज औलाद कहा जाता है” – पूरन सिंह जाट
रिटायर्ड शिक्षक पूरन सिंह जाट ने आरोप लगाया कि स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी उन्हें शिक्षक और सहायक शिक्षक से अलग मानते हैं. उन्होंने कहा, “मेरी भर्ती शिक्षा कर्मी के रूप में हुई थी, इसलिए मुझे अधिकारी ‘नाजायज औलाद’ कहते हैं और सौतेला व्यवहार कर रहे हैं. अधिकारी मुझसे कहते हैं कि सीनियर अधिकारियों से समझौता कर लो, तभी तुम्हारी राशि जारी की जाएगी.”
119वें आवेदन पर प्रशासन की प्रतिक्रिया
शिक्षक ने अपने 119वें आवेदन के जरिए ग्वालियर कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान से गुहार लगाई है. इस पर जिला पंचायत के सीईओ विवेक कुमार ने संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है. विवेक कुमार ने कहा कि, “पूरन सिंह जाट के वेतनमान से जुड़ी कुछ कानूनी समस्याएं सामने आई हैं. हमने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द उनकी शेष राशि जारी की जाए.”
कब मिलेगा रिटायर्ड शिक्षक को न्याय?
पूरन सिंह जाट अपनी पेंशन और अन्य बकाया राशि पाने के लिए पिछले एक साल से संघर्ष कर रहे हैं. उन्होंने प्रशासन से जल्द न्याय की मांग की है. अब देखना होगा कि 119 आवेदन देने के बाद भी दर-दर भटक रहे इस बुजुर्ग शिक्षक को कब तक उनका हक मिलता है.
ग्वालियर से मनोज चौबे की रिपोर्ट
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-भारत एक्सप्रेस
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