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मध्य प्रदेश में जल्द लागू होगा UCC! सरकार ने जस्टिस रंजना देसाई के हाथ में सौंपीं कमान, क्या उत्तराखंड जैसी सफलता मिल पाएगी?

मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज, ड्राफ्ट बनाने की जिम्मेदारी Ranjana Prakash Desai को सौंपी गई. सरकार ने 60 दिनों की समयसीमा तय की है, जिससे ‘उत्तराखंड मॉडल’ लागू होने के संकेत मिल रहे हैं…

Madhya Pradesh UCC Committee: मध्य प्रदेश में ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) को लेकर शिवराज सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा दांव चल दिया है. राज्य सरकार ने UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए जिस विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, उसकी कमान जस्टिस रंजना प्रसाद देसाई को सौंपकर साफ कर दिया है कि एमपी में भी ‘उत्तराखंड मॉडल’ लागू होने जा रहा है.

बता दें कि जस्टिस देसाई वही चेहरा हैं जिन्होंने उत्तराखंड में देश का पहला UCC ड्राफ्ट तैयार किया था, जो न केवल पास हुआ बल्कि कानून भी बना. अब वही अनुभव मध्य प्रदेश की कानूनी तस्वीर (Uniform Civil Code India, MP) बदलने की तैयारी में है.

उत्तराखंड वाला ‘विनिंग फॉर्मूला’ अब मध्य प्रदेश में?

मध्य प्रदेश सरकार ने रंजना देसाई को अध्यक्ष बनाकर एक तीर से दो निशाने साधे हैं. पहला, उन्हें UCC के पेचीदा मुद्दों को सुलझाने का महारत हासिल है और दूसरा, उत्तराखंड में उनके ड्राफ्ट को मिली संवैधानिक सफलता ने सरकार का भरोसा मजबूत किया है.

बताते चलें जस्टिस देसाई के नेतृत्व वाली यह कमेटी अब उत्तराखंड की तर्ज पर मध्य प्रदेश के सामाजिक और धार्मिक ताने-बाने का अध्ययन करेगी. सरकार ने उन्हें महज 60 दिन का समय दिया है, जो यह दर्शाता है कि प्रशासन इसे जल्द से जल्द कानूनी अमलीजामा पहनाने की तैयारी में है.

जस्टिम रंजना देसाई के नेत्रत्व में टीम का गठन(MP UCC)

SC की रिटायर्ड जज जस्टिम रंजना देसाई के नेत्रत्व में 6 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है. जिसमें कानून, प्रशासन और शिक्षा जगत के अनुभवी चेहरों को जगह दी गई है:

अध्यक्ष: न्यायमूर्ति रंजना प्रसाद देसाई (रिटायर्ड जज, सुप्रीम कोर्ट)

सदस्य: शत्रुघ्न सिंह (रिटायर्ड IAS), अनूप नायर (कानूनविद), गोपाल शर्मा (शिक्षाविद), बुधपाल सिंह (सामाजिक कार्यकर्ता)

सचिव: अजय कटेसरिया (अपर सचिव, सामान्य प्रशासन)

यह टीम न केवल कानूनी पहलुओं को देखेगी, बल्कि सामाजिक ढांचे और आम जनता की भावनाओं का भी अध्ययन करेगी.

किन मुद्दों पर रहेगा खास फोकस?(Uniform Civil Code India, MP)

यूसीसी लागू होने के बाद प्रदेश में विवाह, तलाक, गोद लेने और विरासत जैसे निजी कानून पूरी तरह बदल जाएंगे. समिति का मुख्य फोकस महिला व बाल अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विशेष बिंदुओं पर रहेगा.

ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान आम जनता, विभिन्न धार्मिक संगठनों और विशेषज्ञों से सुझाव और आपत्तियां भी मांगी जाएंगी, ताकि कानून को समावेशी और धर्म-निरपेक्ष बनाया जा सके. इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा कानूनी ढांचा तैयार करना है जहाँ धर्म के आधार पर कानून अलग-अलग न हों.

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क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) और इसका असर?

यूसीसी का सीधा मतलब है कि एक देश, एक कानून. वर्तमान में भारत में अलग-अलग धर्मों के अपने पर्सनल लॉ (जैसे हिंदू मैरिज एक्ट, मुस्लिम पर्सनल लॉ) हैं. यूसीसी लागू होने के बाद शादी, तलाक, संपत्ति का बंटवारा और बच्चा गोद लेने जैसे मामलों में पूरे प्रदेश में धर्म निरपेक्ष रूप से एक ही कानून लागू होगा.

इससे खास तौर पर महिलाओं को सशक्त बनाने और कानूनी पेचीदगियों को खत्म करने में मदद मिलने की उम्मीद है. मध्य प्रदेश में इस कदम को आगामी चुनावों और प्रशासनिक सुधारों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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