Women reservation bill Sansad: पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi) की सरकार जल्द ही संसद में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने से जुड़े अहम बदलाव करने की तैयारी में है. इस पहल का उद्देश्य महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना और उन्हें बराबरी का प्रतिनिधित्व देना है.
जनगणना से अलग हो सकता है आरक्षण
अब तक यह आरक्षण नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत अगली जनगणना और परिसीमन से जुड़ा हुआ था. लेकिन जनगणना में देरी को देखते हुए सरकार इसे इन प्रक्रियाओं से अलग कर लागू करने पर विचार कर रही है. इसका मतलब है कि महिलाओं को आरक्षण का लाभ जल्दी मिल सकता है.
राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर इस मुद्दे पर सहमति बनाने की कोशिश की है. सरकार चाहती है कि इस बदलाव को संसद में व्यापक समर्थन मिले.
नेताओं का मिला समर्थन
इस प्रस्ताव का कई दलों की महिला सांसदों ने स्वागत किया है. भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने इसे महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया. वहीं शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि इससे महिलाओं को उनका अधिकार मिलेगा.
जेडीयू की लवली आनंद और कांग्रेस की रजनी पाटिल ने भी इस पहल का समर्थन किया. समाजवादी पार्टी की इकरा हसन ने कहा कि अब इस कानून को जमीन पर लागू करना जरूरी है.
लोकसभा सीटों में बड़ा बदलाव संभव
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर लगभग 816 हो सकती हैं. इनमें से करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. इससे संसद में महिलाओं की भागीदारी काफी बढ़ेगी.
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बहुमत का आंकड़ा भी बदलेगा
सीटें बढ़ने के साथ ही लोकसभा में बहुमत का आंकड़ा भी बढ़कर 409 हो जाएगा. हालांकि, सरकार के पास अभी अकेले इस बिल को पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है, लेकिन वह इसे मौजूदा बजट सत्र में पास कराने की कोशिश कर रही है.
अगर यह बदलाव लागू होता है, तो यह भारत की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है और महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में मजबूत भागीदारी मिलेगी.
-भारत एक्सप्रेस
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