National Unity Day 2025: पूरा देश आज ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ मना रहा है. यह दिवस भारत के ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित है. सरदार पटेल के सम्मान के रूप में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने 2014 में इसकी शुरुआत की थी.
Statue of Unity बनाने का सपना
सरदार पटेल की 150वीं जयंती के मौके पर ‘मोदी आर्काइव’ के ‘एक्स’ हैंडल पर कई पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री मोदी के सरदार पटेल के प्रति सम्मान और ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के विजन की पूरी कहानी को बताया गया है. पोस्ट में लिखा है, “अक्टूबर 2010 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश को एकजुट करने का एक विचार शेयर किया.” उनका उद्देश्य भारत की एकता और पटेल की विरासत को मनाना था.

पीएम मोदी का बयान और उद्देश्य
पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयानों का भी जिक्र है. मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने कहा था, “सरदार पटेल की प्रतिमा उन लोगों को याद दिलाएगी जो भारत के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं कि यह राष्ट्र शाश्वत था, है और रहेगा.” उनके लिए यह प्रतिमा एक स्मारक से अधिक थी, यह भारत की एकता का प्रतीक थी.
ये प्रतिमा इंजीनियरिंग का चमत्कार
इसके अलावा पोस्ट में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के निर्माण के बारे में जानकारी दी गई है. 182 मीटर ऊंची यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है, जो बिना सहारे के खड़ी है. तीसरी श्रेणी के भूकंपीय क्षेत्र में निर्मित इस प्रतिमा ने प्राकृतिक चुनौतियों का सामना किया.

पर्यटन सर्किट में बदल गया केवड़िया
31 अक्टूबर, 2018 को उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी भावुक हो गए. देशवासियों से जुटाए लोहे के टुकड़े को हाथ में लेते हुए उन्होंने कहा, “यह सिर्फ धातु नहीं है, यह एकता की शक्ति में विश्वास है.” ‘मोदी आर्काइव’ के एक अन्य पोस्ट में लिखा गया कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ने केवड़िया को पर्यटन सर्किट में बदल दिया, जिससे आर्थिक विकास और स्थानीय आदिवासी समुदायों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए. यह ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का प्रतीक है.
पीएम मोदी ने ‘एकता नगर’ में ली ‘सबसे बड़ी शपथ’, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर सरदार पटेल को किया नमन
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