रिपोर्ट- प्रमोद यादव
Chhattisgarh News: एमसीबी जिले (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) के चिरमिरी में स्थित एनसीपीएच (NCPH) अस्पताल, जिसे कभी पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य जीवनरेखा माना जाता था, आज बदहाली और उपेक्षा की तस्वीर बन चुका है. एक समय था जब इस अस्पताल की ओपीडी में रोज सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते थे. दूर-दराज के गांवों से लोग भरोसे के साथ यहां आते थे, लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं.
कभी मरीजों की भीड़, डॉक्टरों की भागदौड़ और इलाज की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला यह अस्पताल अब सन्नाटे में डूबा नजर आता है. ओपीडी में जहां पहले लंबी कतारें लगती थीं, वहां आज वीरानी पसरी हुई है. अस्पताल के गलियारों में बंद कमरों के ताले और सूने वार्ड सिस्टम की लापरवाही की कहानी बयां कर रहे हैं.
अस्पताल लापरवाही का शिकार
अस्पताल का ऊपरी हिस्सा किसी तरह काम कर रहा है, लेकिन निचली यूनिट की स्थिति बेहद चिंताजनक है. कई वार्ड बंद पड़े हैं, जरूरी स्टाफ नदारद है और इलाज की जगह अब खामोशी ने ले ली है. रख-रखाव के अभाव में भवन भी जर्जर होता जा रहा है. दीवारें, छत और कमरों की हालत इस बात का संकेत देती है कि अस्पताल खुद इलाज का मोहताज हो गया है.
SECL जिम्मेदारी से भागता हुआ
इस पूरे हालात के लिए सबसे बड़ा सवाल एसईसीएल (SECL) प्रबंधन पर खड़ा हो रहा है. सामाजिक जिम्मेदारी के तहत यह अस्पताल एसईसीएल के अधीन आता है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रबंधन ने इस संस्थान से मुंह मोड़ लिया है. मैनपावर की भारी कमी ने अस्पताल की कार्यप्रणाली को पूरी तरह पंगु बना दिया है. न पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ है, न वार्ड बॉय और न ही सहायक कर्मचारी.
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नतीजतन मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां महंगे इलाज का बोझ आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर एसईसीएल प्रबंधन गंभीरता दिखाए और तत्काल नर्सिंग व सहायक कर्मचारियों की भर्ती करे, तो यही अस्पताल फिर से क्षेत्र के लोगों के भरोसे का केंद्र बन सकता है और ओपीडी में दोबारा रौनक लौट सकती है.
-भारत एक्सप्रेस
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