NDA Parliamentary Meet: संसद के मानसून सत्र के बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की संसदीय दल की बैठक बुलाई गई. यह बैठक संसद भवन स्थित बालयोगी सभागार में आयोजित की गई, जिसमें एनडीए के सभी सांसदों की मौजूदगी रही. बैठक की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत और राज्यसभा में हाल ही में निर्वाचित सांसदों के परिचय से हुई. इनमें वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम, सी. सदानंद मास्टर और पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला शामिल रहे.
बैठक में 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मारे गए 26 निर्दोष पर्यटकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. साथ ही, भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव में दिखाए गए शौर्य और साहस की सराहना करते हुए प्रस्ताव भी पारित किया गया.
यह बैठक ऐसे वक्त बुलाई गई है जब विपक्ष चुनाव आयोग की भूमिका, पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर हमलावर है. ऐसे में माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संबोधन में सांसदों को विपक्ष के आरोपों का तथ्यों और तर्कों के साथ जवाब देने की रणनीति देंगे.
ऑपरेशन सिंदूर पर प्रस्ताव पास
बैठक में पारित प्रस्ताव में एनडीए सांसदों ने ऑपरेशन सिंदूर के लिए सशस्त्र बलों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व की सराहना की. प्रस्ताव में कहा गया कि यह कार्रवाई केवल सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और सजग लोकतंत्र की नैतिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसने निर्दोष नागरिकों के जीवन की रक्षा के लिए आतंकियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया.
ऑपरेशन सिंदूर को मिला महिलाओं का समर्थन
एनडीए ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय महिलाओं, खासकर नारी शक्ति का विशेष समर्थन मिला. सिंदूर हमारे समाज में विवाह और सम्मान का प्रतीक है, जिसे आतंकियों ने हमारी बहनों और माताओं से छीनने की कोशिश की. ऑपरेशन सिंदूर इस पवित्र प्रतीक की रक्षा में चला गया निर्णायक जवाब था.
प्रधानमंत्री की सख्त चेतावनी और दृढ़ नीति
बैठक में किरण रिजिजू ने कहा कि पीएम मोदी ने लोकसभा में विपक्ष के ‘नैरेटिव’ को तार-तार किया है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मधुबनी (बिहार) की धरती से 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने कहा था,
“भारत आतंकवाद को न तो भूलता है, न माफ करता है. हम आतंकियों को उनके अंजाम तक पहुंचाएंगे, चाहे वे धरती के किसी भी कोने में हों.”
एनडीए प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि यह भारत के उस बदले हुए दृष्टिकोण का प्रतीक है, जो 2014 के बाद स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. जहां अगर भारत पर हमला होता है, तो जवाब हमारे ही नियमों पर दिया जाएगा.
प्रधानमंत्री मोदी की तीन प्रमुख रणनीतिक घोषणाएं इस बैठक में दोहराई गईं:
- यदि भारत पर आतंकी हमला होता है, तो सटीक और तीव्र प्रतिक्रिया दी जाएगी.
- भारत किसी भी प्रकार के परमाणु ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेगा.
- हम आतंकी संगठनों और उन्हें पनाह देने वाले राष्ट्रों में कोई भेद नहीं करेंगे.
क्या हुआ था पहलगाम में?
22 अप्रैल को लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी. आतंकियों ने पीड़ितों को उनके धर्म के आधार पर अलग करके गोलियों से भून डाला. इस वीभत्स कृत्य ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था.
इसके जवाब में भारत ने 6-7 मई की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर नष्ट किया गया. इस सटीक और रणनीतिक हमले ने यह संदेश दिया कि भारत अब चुप नहीं बैठेगा.
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विपक्ष के सवालों का जवाब और आगामी रणनीति
बैठक ऐसे समय हो रही है जब विपक्ष सरकार पर हमलावर है. लेकिन एनडीए की ओर से साफ संकेत है कि प्रधानमंत्री मोदी स्वयं मोर्चा संभालेंगे और इन हमलों का तथ्यों के साथ जवाब देंगे.
गौरतलब है कि 7 अगस्त से उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो रही है, और माना जा रहा है कि एनडीए इस बैठक में उपराष्ट्रपति पद को लेकर भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देगा.
– भारत एक्सप्रेस
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