देश की सियासत में ‘ऑपरेशन टाइगर’ और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर हुई ऐतिहासिक महा-बगावत ने विपक्ष के खेमे में तहलका मचा दिया है. जून में महाराष्ट्र के ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए, तो वहीं बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद टीएमसी के 20 सांसदों ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया. हालांकि, इसके बाद भी NDA के पास दो-तिहाई का पूरा बहुमत नहीं है. विपक्ष में मची इस भारी तोड़फोड़ के बीच संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है. ऐसे में कई सियासी समीकरणों पर चर्चा हो रही है.
इस सत्र में केंद्र सरकार देश की दशा-दिशा बदलने वाले बड़े और कड़े संविधान संशोधन विधेयक लाने के लिए तैयार है. हालांकि, राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि इतनी बड़ी तोड़फोड़ के बाद भी एनडीए (NDA) दो-तिहाई बहुमत के जादुई आंकड़े से 41 सीटें दूर है. आइए समझते हैं लोकसभा बीजेपी इस 41 सीटों की कमी को कैसे पूरा करने का प्लान बना रही है.
क्या है लोकसभा का संवैधानिक नियम?
संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी बड़े संवैधानिक संशोधन को पारित कराने के लिए सरकार को सामान्य बहुमत नहीं, बल्कि विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है. इसके लिए दो कड़े संवैधानिक नियमों को पूरा करना अनिवार्य है.
कुल सदन का बहुमत: सदन की कुल मौजूदा सदस्य संख्या 540 का दो-तिहाई यानी कम से कम 360 सांसदों का लिखित समर्थन होना चाहिए.
उपस्थित और मतदान: वोटिंग के दिन सदन में जितने सांसद उपस्थित होकर मतदान करेंगे, उनमें से दो-तिहाई (2/3) का पक्ष में वोट डालना जरूरी है.
सदन के भीतर की मौजूदा स्थिति
शिवसेना (UBT) के 6 और टीएमसी के 20 बागी सांसदों के जुड़ने के बाद एनडीए का कुनबा बढ़कर 318 से 319 सांसदों तक पहुंच गया है. इस भारी इजाफे के बाद भी, पूर्ण मतदान की स्थिति में एनडीए विशेष बहुमत (360) के लक्ष्य से 41 से 42 सीटें कम है. इस तोड़फोड़ से पहले विपक्षी गठबंधन के पास 225 सांसद थे, जो अब घटकर केवल 199 के आसपास सिमट कर रह गए हैं.
कैसे पूरी होगी 41 सीटों की कमी?
इस 41 सीटों की खाई को पाटने और संविधान संशोधन को हर हाल में पास कराने के लिए भाजपा ने पर्दे के पीछे एक बेहद रणनीतिक और कूटनीतिक चक्रव्यूह तैयार किया है. सबसे पहले बीजेपी आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के 4 सांसदों का समर्थन हासिल करने के लिए संपर्क में है, जिससे यह दूरी घटकर 37-38 सीटों पर आ जाएगी.
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दो-तिहाई बहुमत की दूसरी शर्त का लाभ उठाने के लिए बीजेपी विपक्ष के भीतर ही असंतोष को हवा दे रही है. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस से नाराज चल रही द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के 22 सांसद और एनसीप-शरद पवार गुट के 8 सांसद यदि वोटिंग के दिन रणनीतिक रूप से सदन से वॉकआउट कर जाते हैं या अनुपस्थित रहते हैं, तो सदन में मतदान करने वाले कुल सांसदों का आंकड़ा गिर जाएगा.
330 हो जाएगा 360 का आंकड़ा
यदि डीएमके और एनसीपी जैसी क्षेत्रीय पार्टियां मतदान प्रक्रिया से बाहर रहती हैं, तो दो-तिहाई विशेष बहुमत के लिए आवश्यक 360 का आंकड़ा घटकर महज 330 के आसपास आ जाएगा. इस बदली हुई परिस्थिति में एनडीए (319) के लिए कुछ निर्दलीय सांसदों और छोटे दलों के सहयोग से 330 का जादुई बैरियर तोड़ना बच्चों का खेल हो जाएगा. यही वजह है कि विपक्ष में मचे घमासान के बावजूद सरकार इस मानसून सत्र में परिसीमन और मंत्रियों से जुड़े सख्त विधेयकों को पटल पर रखकर देश की पूरी सियासत को एक नए मोड़ पर ले जाने के लिए पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है.
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