NEET Paper Leak CBI Investigation: देश के लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार के सख्त रुख के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अब तक की सबसे भीषण कार्रवाई की है. सरकार की लिखित शिकायत पर केस दर्ज होने के बाद सीबीआई ने देशव्यापी स्तर पर छापेमारी कर इस सिंडिकेट के ‘मास्टरमाइंड्स’ को दबोचने का सिलसिला जारी है.
इसी कड़ी (NEET Paper Leak Timeline) में सोमवार (18 मई 2026) को इस मामले में 10वीं सबसे बड़ी गिरफ्तारी हुई है, जिसने महाराष्ट्र से लेकर राजस्थान तक के कोचिंग माफियाओं की नींद उड़ा दी है. सीबीआई की स्पेशल टीमों ने अब तक की पड़ताल में परीक्षा से पहले लीक हुए रसायन विज्ञान (Chemistry) और जीव विज्ञान (Biology) के प्रश्न पत्रों के वास्तविक स्रोत (Original Source) का पर्दाफाश कर दिया है.
लातूर: 10वीं गिरफ्तारी से कांपा कोचिंग जगत
इस ताबड़तोड़ एक्शन के तहत सीबीआई ने सोमवार को महाराष्ट्र के लातूर से केमिस्ट्री कोचिंग के बेताज बादशाह और 9 शाखाओं वाले ‘रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस’ (RCC) के मालिक प्रोफेसर शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार कर लिया. 100 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर वाले इस कोचिंग साम्राज्य के मेन ऑफिस और मोटेगांवकर के आवास पर जब सीबीआई ने 8 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया, तो वहां से कई लैपटॉप, बैंक स्टेटमेंट और सबसे सनसनीखेज सबूत मोटेगांवकर का मोबाइल फोन बरामद हुआ.

बता दें कि इस मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में 3 मई को आयोजित होने वाली नीट परीक्षा के हूबहू लीक प्रश्न और उत्तर पुस्तिका की डिजिटल कॉपियां मिलीं. जांच में साफ हुआ है कि मोटेगांवकर इस संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य है, जिसने एनटीए से जुड़े अपने करीबी और रसायन विज्ञान के व्याख्याता पी.वी. कुलकर्णी के साथ मिलकर परीक्षा से बहुत पहले यानी 23 अप्रैल को ही पेपर हासिल कर लिया था और इसे विवेक पाटिल समेत कई रसूखदार डॉक्टरों और छात्रों को लाखों रुपये में बेचकर सबूत मिटाने की कोशिश की थी.
पुणे: NTA के अंदर बैठे ‘विलेन’ बेनकाब (NEET Paper Leak Timeline)
सीबाईआई की इस गहन पड़ताल से यह भी साफ हो गया है कि पेपर लीक की शुरुआत एनटीए के भीतर से ही हुई थी. एनटीए ने पुणे की सीनियर बॉटनी प्रोफेसर मनीषा गुरुनाथ मंधारे और लातूर के पीवी कुलकर्णी को पेपर तैयार करने वाली बेहद गोपनीय एक्सपर्ट टीम में शामिल किया था. मंधारे के पास बॉटनी व जूलॉजी और कुलकर्णी के पास केमिस्ट्री के पेपर का पूरा एक्सेस था, जिसका फायदा उठाकर इन्होंने गोपनीयता की शर्तों को बेच दिया.
वहीं मनीषा मंधारे ने अप्रैल के दौरान पुणे में ब्यूटीपार्लर चलाने वाली मनीषा वाघमारे के जरिए रसूखदार और ट्यूशन की तलाश कर रहे छात्रों को इकट्ठा किया और अपने ही घर पर लीक प्रश्नों की विशेष कोचिंग क्लास चलाई. वाघमारे ने कमीशन के चक्कर में नामचीन स्कूलों के शिक्षकों और अमीर छात्रों को इस नेटवर्क से जोड़ा था, जिसे सीबीआई ने 14 मई को ही दबोच लिया था.
सीकर’ बना पेपर लीक का मुख्य केंद्र(NEET Paper Leak)
सीबीआई और राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में इस पूरे नेटवर्क का सबसे खतरनाक केंद्र राजस्थान का शिक्षा हब ‘सीकर’ और जयपुर बनकर उभरा है, जहां से लीक पेपर को बड़े स्तर पर छात्रों तक डिस्ट्रीब्यूट किया गया. इस सिंडिकेट की आंच जब जयपुर के जमवा रामगढ़ में दिनेश और मांगीलाल नाम के दो भाइयों के बिवाल परिवार तक पहुंची, तो पूरे देश में हड़कंप मच गया.

आरोप है कि परिवार के मुखिया मांगीलाल बिवाल ने अपने बेटे-बेटियों और भतीजे-भतीजी के लिए यह लीक पेपर खरीदा था और चौंकाने वाली बात यह है कि इस एक ही परिवार के पांच-पांच सदस्य इस वक्त अलग-अलग कॉलेजों से MBBS की पढ़ाई कर रहे हैं. अब जांच की आंच दौसा के पंडित नवल किशोर शर्मा मेडिकल कॉलेज तक पहुंच गई है, जहां मांगीलाल की बेटी और मेडिकल प्रथम वर्ष की छात्रा प्रगति बिवाल 14 मई को कॉलेज से छुट्टी लेकर गायब है, जिसका सुराग लगाने में एजेंसियां जुटी हुई हैं.
नासिक से लातूर तक: मामले की पूरी ‘क्राइम टाइमलाइन’
इस पूरे रैकेट (NEET Paper Leak Timeline) का घटनाक्रम बेहद सोची-समझी साजिश के तहत आगे बढ़ा था. इसकी शुरुआत 23 अप्रैल 2026 को हुई जब आरोपी मोटेगांवकर और अन्य सहयोगियों ने एनटीए के एक्सपर्ट्स के जरिए प्रश्नपत्र और उत्तरपुस्तिका हासिल कर ली. इसके बाद 29 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र के नासिक में यह पेपर सबसे पहले टेलीग्राम ग्रुप पर लीक हुआ, जहां शुभम खैरनार नाम के शख्स ने धनंजय लोखंडे से प्राप्त प्रश्नपत्र की पीडीएफ यश यादव को फॉरवर्ड की और इसे गुड़गांव भेज दिया गया.
इसके बाद सरकार के कड़े रुख के बीच 12 मई 2026 को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की लिखित शिकायत पर सीबीआई ने आधिकारिक तौर पर केस दर्ज कर कमान संभाली और उसी दिन नासिक पुलिस ने शुभम खैरनार को गिरफ्तार कर सीबीआई को सौंप दिया.
अगले दो दिनों में यानी 14 और 15 मई 2026 को सीबीआई ने पुणे से ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे, प्रोफेसर मनीषा मंधारे और लातूर में मोटेगांवकर के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की. आखिरकार, पिछले 24 घंटों में 5 जगहों पर चली महा-तलाशी के बाद 18 मई 2026 को सीबीआई ने 10वें मुख्य आरोपी शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया.
अब तक दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिलियानगर से कुल 10 किरदार सलाखों के पीछे जा चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट में इस पूरी परीक्षा प्रणाली को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में बदलने की याचिका पर भी सुनवाई तेज हो गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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