सांसद देवेश चंद्र ठाकुर, मराठियों का बिहारी मददगार
सीतामढ़ी/काठमांडू: नेपाल में ग्लेशियर फटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने सिर्फ तबाही ही नहीं मचाई, बल्कि वहां घूमने गए भारतीय सैलानियों के सामने मौत का खौफनाक मंजर भी खड़ा कर दिया. इस जलप्रलय में सबसे ज्यादा मुश्किलें महाराष्ट्र से पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए गए सैलानियों (मराठी मानुष) को उठानी पड़ीं. चारों तरफ पानी का तेज बहाव और टूटते संपर्क मार्गों के बीच जब जिंदगी की उम्मीदें टूटने लगीं, तब बिहार के सीतामढ़ी से जेडीयू (JDU) सांसद देवेश चंद्र ठाकुर उनके लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आए.
‘आंखों के सामने मां को आया हार्ट अटैक’
भारत-नेपाल सीमा के भीठामोड़ बॉर्डर से सुरक्षित भारत पहुंचे सैलानियों ने ‘भारत एक्सप्रेस’ की टीम को अपनी रोंगटे खड़े कर देने वाली आपबीती सुनाई. सबसे दर्दनाक कहानी वनिता तिवारी और उनकी मां निर्मला पांडे की है. सैलाब के बीच फंसी निर्मला पांडे इस भयानक मंजर को देखकर इतना घबरा गईं कि उन्हें अचानक हार्ट अटैक आ गया. मां को जिंदगी और मौत के बीच जूझता देख बेटी वनिता टूट गई. फिलहाल निर्मला नेपाल के ही एक अस्पताल में फंसी हुई हैं और बेटी की आंखों में मां को सुरक्षित भारत लाने की चिंता और निराशा साफ झलक रही है.
‘पुल पार किया और पीछे सब पानी में समा गया’
नागपुर से गए योगेश का अनुभव भी कम डरावना नहीं था. उन्होंने बताया कि जिस संपर्क मार्ग और ब्रिज को उन्होंने पार किया, उनके वहां से गुजरते ही पानी का स्तर भयानक तेजी से बढ़ने लगा. देखते ही देखते वह पुल आधे से ज्यादा पानी में डूब गया और कुछ ही पलों में तिनके की तरह टूटकर बह गया. योगेश सिहरते हुए कहते हैं, “अगर हम कुछ सेकंड और वहां रुक जाते, तो आज जिंदा नहीं होते.”
जब बिहारी सांसद ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल की इस भयानक त्रासदी से सुरक्षित भारत लौटे सैलानियों के चेहरों पर राहत तो थी, लेकिन खौफ अब भी कायम था. ऐसे वक्त में जब ‘मराठी मानुष’ पर बड़ा संकट आया, तब सीतामढ़ी के जेडीयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर (Devesh Chandra Thakur) ने राजनीति और क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर इंसानियत की मिसाल पेश की. सांसद खुद पीड़ित लोगों से मिलने बॉर्डर पर पहुंचे, उनका हाल जाना और हर संभव मदद (मेडिकल से लेकर सुरक्षित घर वापसी तक) का पक्का भरोसा दिया.
दर्द के बीच एक उम्मीद
नेपाल के उन इलाकों में सबसे डरावना मंजर दिखा जहां पुल और रास्ते पानी में समा गए. कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह कट चुका है. हालांकि, महाराष्ट्र के इन सैलानियों के लिए यह त्रासदी जीवन भर न भूलने वाला एक बुरा सपना बन गई है, लेकिन जिस तरह से एक बिहारी सांसद ने आगे आकर उन्हें संभाला, उसने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में पूरा देश एक साथ खड़ा है.
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