Bharat Express DD Free Dish

EXPLAINER: BRICS का अपना बैंक NDB क्या है? भारत को कैसे होता है फायदा, IMF से कितना अलग?

BRICS New Development Bank: BRICS शिखर सम्मेलन 2026 में न्यू डेवलपमेंट बैंक पर खास ध्यान है. यह बैंक भारत समेत सदस्य देशों को सड़क, रेल, ऊर्जा और शहरी विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय मदद देता है. जानिए NDB और IMF में क्या अंतर है और भारत को इससे कितनी राहत मिलती है.

What is the NDB, BRICS' own bank?

BRICS का अपना बैंक NDB क्या है?

BRICS New Development Bank: नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन जारी है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत सदस्य देशों के नेता राजधानी में मौजूद हैं. सम्मेलन 13 सितंबर तक चलेगा. इस बीच न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) पर भी ध्यान गया है, जो BRICS देशों की साझा पहल है. सवाल उठता है कि यह बैंक क्या है, भारत को इससे क्या राहत मिलती है और यह आईएमएफ से कितना अलग है.

कब हुई थी न्यू डेवलपमेंट बैंक की शुरुआत?

ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर 2015 में न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना की. इसका मुख्यालय चीन के शंघाई में है. बैंक का मकसद विकासशील देशों को बुनियादी ढांचे और सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय मदद देना है. सड़क, रेल, बिजली, जल प्रबंधन, डिजिटल नेटवर्क और स्वच्छ ऊर्जा जैसी परियोजनाएं इसके दायरे में आती हैं.

क्यों बना नया बैंक?

विश्व बैंक और आईएमएफ में पश्चिमी देशों का दबदबा लंबे समय से रहा है. विकासशील देशों को लगता था कि उनकी आर्थिक ताकत और जनसंख्या के अनुपात में उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता. BRICS देशों की अर्थव्यवस्थाएं तेजी से बढ़ रही थीं, लेकिन उन्हें महंगे कर्ज पर निर्भर रहना पड़ता था. इसी असंतुलन को दूर करने के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक बनाया गया.

NDB का उद्देश्य और कामकाज क्या है?

NDB का मकसद किसी पुराने संस्थान को खत्म करना नहीं है, बल्कि विकासशील देशों को एक अतिरिक्त विकल्प देना है. यह परियोजना आधारित ऋण देता है, जो आमतौर पर लंबी अवधि के लिए होता है. बैंक स्थानीय मुद्रा में भी वित्तीय सहायता देने की दिशा में काम करता है, जिससे विदेशी मुद्रा जोखिम कम हो सके.

भारत को NDB से कितना फायदा है?

भारत इस बैंक का संस्थापक सदस्य है, इसलिए इसकी भूमिका अहम है. भारत को कई क्षेत्रों में इससे लाभ मिलता है.

  • बुनियादी ढांचे के लिए वित्त: सड़क, रेल, मेट्रो और जल प्रबंधन जैसी परियोजनाओं में भारी निवेश की जरूरत होती है. NDB से मिलने वाला वित्त सरकार पर तत्काल दबाव कम करता है.
  • स्वच्छ ऊर्जा: भारत सौर और पवन ऊर्जा पर जोर दे रहा है. NDB से सौर पार्क, बिजली ग्रिड और हरित परिवहन को बढ़ावा मिल सकता है.
  • शहरी विकास: तेजी से बढ़ती जनसंख्या वाले शहरों को बेहतर परिवहन, सीवरेज और जल आपूर्ति की जरूरत है. NDB का वित्त इन क्षेत्रों में मददगार है.
  • विदेशी मुद्रा जोखिम: डॉलर में कर्ज महंगा पड़ सकता है. स्थानीय मुद्रा में वित्त मिलने से यह जोखिम घटता है.
  • वित्तीय स्वतंत्रता: भारत को अलग-अलग संस्थानों से धन जुटाने का विकल्प मिलता है, जिससे बातचीत की स्थिति मजबूत होती है.

NDB और IMF में अंतर

दोनों संस्थान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे का हिस्सा हैं, लेकिन कामकाज अलग है.

  • IMF का मकसद देशों को आर्थिक संकट से निकालना है.
  • NDB का ध्यान विकास परियोजनाओं पर है.
  • IMF कर्ज देने से पहले आर्थिक सुधारों की शर्तें रख सकता है.
  • NDB की शर्तें परियोजना पर केंद्रित रहती हैं.
  • IMF का प्रभाव वैश्विक स्तर पर है, जबकि NDB की शुरुआत BRICS देशों ने की थी.

क्या IMF का विकल्प है?

NDB को IMF का सीधा विकल्प नहीं कहा जा सकता. IMF विदेशी मुद्रा संकट में मदद करता है, जबकि NDB लंबी अवधि की परियोजनाओं को वित्त देता है. दोनों संस्थान एक-दूसरे के पूरक हैं. IMF स्थिरता लाता है और NDB विकास को गति देता है.

क्या है चुनौतियां?

NDB को अपनी ऋण देने की क्षमता बढ़ानी होगी. परियोजनाओं की मंजूरी और क्रियान्वयन में पारदर्शिता जरूरी है. राजनीतिक मतभेदों से दूर रहना होगा ताकि बैंक का काम प्रभावित न हो. स्थानीय मुद्रा में ऋण देने की व्यवस्था मजबूत करनी होगी. साथ ही पर्यावरण और समाज पर असर को ध्यान में रखना होगा.

कैसा है पूंजी जुटाने का तरीका?

NDB की शुरुआती अधिकृत पूंजी 100 अरब डॉलर थी. इसमें से 50 अरब डॉलर संस्थापक देशों ने बराबर योगदान दिया. बाकी 50 अरब डॉलर जरूरत पड़ने पर जुटाए जा सकते हैं. बैंक अपनी पूंजी और सदस्य देशों की गारंटी के आधार पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बॉन्ड जारी करता है. इनसे जुटाई गई रकम को परियोजनाओं में लगाया जाता है.

अब तक की फंडिंग

31 दिसंबर 2025 तक बैंक ने लगभग 42.9 अरब डॉलर के लोन मंजूर किए हैं. इसका वार्षिक फंडिंग कार्यक्रम 5 से 6 अरब डॉलर के बराबर रहने की उम्मीद है. वास्तविक राशि बाजार की स्थिति और निवेशकों की मांग पर निर्भर करती है.

ये भी पढ़ें-7 साल बाद भारत आए जिनपिंग, पीएम मोदी-जिनपिंग की बैठक पर दुनिया की नजर, सीमा से व्यापार तक होगा मंथन

न्यू डेवलपमेंट बैंक विकासशील देशों के लिए एक अहम विकल्प है. भारत को इससे बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और शहरी विकास में राहत मिल रही है. IMF और NDB दोनों की भूमिकाएं अलग हैं लेकिन मिलकर वे वैश्विक वित्तीय ढांचे को संतुलित कर सकते हैं.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read