Bharat Express DD Free Dish

अपना ही ‘महा-रिकॉर्ड’ नहीं तोड़ पाईं निर्मला सीतारमण, 84 मिनट में ही खत्म हुआ 71 पन्नों का भाषण!

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में अपना लगातार नौवां बजट पेश किया. 71 पन्नों के इस बजट को पढ़ने में उन्हें महज 84 मिनट लगे, जो उनके 2020 के 162 मिनट के रिकॉर्ड से काफी कम है. देखिए साल 2019 से अब तक उनके बजट भाषणों की पूरी टाइमलाइन.

Budget 2026, Nirmala Sitharaman Speech, Budget Duration Record

Budget 2026: भारत की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए बजट का दिन किसी त्यौहार से कम नहीं होता. इस साल भी 1 फरवरी को सबकी नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी थीं. उन्होंने इस बार 71 पन्नों का बजट भाषण 1 घंटे 24 मिनट में पूरा किया. हालांकि, यह उनके अपने ही पुराने रिकॉर्ड से काफी पीछे रहा, लेकिन इस क्रिस्प प्रेजेंटेशन में उन्होंने देश की आर्थिक दिशा साफ कर दी.

कभी मैराथन स्पीच, तो कभी ‘शॉर्ट एंड स्वीट’ अंदाज

निर्मला सीतारमण का बजट भाषण देने का अपना एक अलग स्टाइल है. साल 2019 से अब तक उन्होंने कुल 9 बजट पेश किए हैं और दिलचस्प बात यह है कि हर बार इसकी लंबाई अलग रही. साल 2020 की उनकी स्पीच तो आज भी एक मिसाल है. उस वक्त उन्होंने 2 घंटे 42 मिनट तक लगातार बोलकर भारत के इतिहास का सबसे लंबा बजट भाषण देने का रिकॉर्ड बनाया था. हालत यह हो गई थी कि बोलते-बोलते उनकी तबीयत थोड़ी नासाज होने लगी थी और आखिरी के दो पन्ने स्पीकर को पढ़ने पड़े थे. वहीं, 2024 के चुनावी साल में उन्होंने महज 56 मिनट में अपनी बात खत्म कर सबको चौंका दिया था.

इतिहास के पन्नों में बजट के रिकॉर्ड

अगर हम इतिहास को पलटकर देखें, तो बजट भाषणों का अपना एक अलग ही रोमांस रहा है. निर्मला जी से पहले जसवंत सिंह ने 2003 में 2 घंटे 13 मिनट का लंबा भाषण दिया था, जिसे उस समय का ‘मैराथन’ माना जाता था. वहीं, 1991 का मनमोहन सिंह का भाषण शब्दों के लिहाज से बहुत भारी था (करीब 18,650 शब्द), जिसने भारत की बंद अर्थव्यवस्था के दरवाजे खोल दिए थे.

Budget 2026, Nirmala Sitharaman Speech, Budget Duration Record

लेकिन रिकॉर्ड सिर्फ लंबे होने के नहीं, छोटे होने के भी हैं. 1977 में एच.एम. पटेल ने महज 800 शब्दों का बजट भाषण पढ़ा था, जो करीब 15 मिनट में ही सिमट गया था. यह भारत का अब तक का सबसे छोटा बजट भाषण माना जाता है.

ये भी पढ़ें- Budget 2026: निर्मला सीतारमण के 9 बजट और 9 साड़ियां, क्या कहता है इतिहास?

क्या समय मायने रखता है?

आज के डिजिटल दौर में एक ट्रेंड साफ दिख रहा है- भाषण अब छोटे और पॉइंट-टू-पॉइंट हो रहे हैं. पहले के दौर में जब सारा डेटा सिर्फ भाषण के जरिए ही बाहर आता था, तब लंबे भाषण जरूरी होते थे. अब सब कुछ एक क्लिक पर उपलब्ध है, इसलिए लोग लंबी भूमिका के बजाय ‘क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा’ जैसी हेडलाइंस पर ज्यादा ध्यान देते हैं.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read