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2034 नहीं 2029 में लागू होगा ‘एक देश, एक चुनाव’? राज्यों से मिली रजामंदी, जानिए प्लान

One Nation One Election 2029: देश में ‘एक देश, एक चुनाव’ को 2034 के बजाय 2029 में ही लागू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं. संसदीय समिति शीतकालीन सत्र में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है. जानिए क्या है मोदी सरकार का मास्टरप्लान.

Prime Minister Narendra Modi government's masterplan for One Nation One Election in 2029, targeting simultaneous Lok Sabha and State Assembly elections in India.

देश में 'एक देश, एक चुनाव' को 2034 की जगह 2029 में ही लागू करने की तैयारियां तेज फोटो क्रेडिट- AI

One Nation One Election 2029: देश में ‘एक देश, एक चुनाव’ को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं. पहले यह कयास लगाए जा रहे थे कि यह ऐतिहासिक चुनावी व्यवस्था 2034 तक ही धरातल पर उतर पाएगी, लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है, वह देश की सियासत में भूचाल लाने के लिए काफी है. सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार 2034 का इंतज़ार करने के मूड में बिल्कुल नहीं है. पूरी कोशिश है कि इस नए चुनावी सिस्टम को 2029 के लोकसभा चुनावों के साथ ही लागू कर दिया जाए.

शीतकालीन सत्र में पेश हो सकती है रिपोर्ट (JPC Report One Nation One Election)

संसद की संयुक्त समिति (JPC) पिछले काफी समय से इस बिल को लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों, कानूनी जानकारों और विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श कर रही है. 41 सदस्यीय यह समिति अपने काम को अंतिम रूप दे रही है और उम्मीद है कि आगामी शीतकालीन सत्र में अपनी रिपोर्ट संसद में जमा कर देगी. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो 2029 का आम चुनाव देश के चुनावी इतिहास का सबसे अलग और अनूठा चुनाव होगा, जहां लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे.

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क्या है सरकार मास्टरप्लान? (Plan On One Nation One Election)

मौजूदा समय में देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार है. इनमें से 11 राज्यों में अगले दो साल के भीतर विधानसभा चुनाव होने हैं. वहीं, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और ओडिशा जैसे चार राज्य ऐसे हैं, जिनके चुनाव पहले से ही लोकसभा के साथ होते हैं.

अगर ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को 2029 में लागू करना पड़ा, तो इसका सीधा मतलब यह होगा कि जनवरी 2029 में ही इन तमाम राज्यों की विधानसभाओं को वक्त से पहले भंग करना पड़ेगा. संविधान का अनुच्छेद 174 (2)(b) राज्यपाल को यह अधिकार देता है कि वह मंत्रिपरिषद की सलाह पर विधानसभा भंग कर सकते हैं. चूंकि इन राज्यों में NDA की ही सरकार है, इसलिए यह बड़ा फैसला लेना केंद्र के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं होगा.

मुख्यमंत्रियों का मिलने लगा है समर्थन (Support For One Nation One Election)

इस मेगा प्लान को लेकर बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने पहले ही हरी झंडी दिखानी शुरू कर दी है. गोवा, हरियाणा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने इस प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया है. दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी 1 जुलाई को समिति के साथ हुई अपनी बैठक में सकारात्मक रुख दिखाया था. उन्होंने साफ कहा था कि अगर राष्ट्रीय हित में चुनाव एक साथ कराने के लिए दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल कम करना पड़े, तो वे इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं.

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अगर यह योजना 2029 में लागू होती है, तो कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों को अपने कार्यकाल के कुछ साल कुर्बान करने पड़ेंगे. इसके अलावा, विपक्षी दलों (जिनकी सरकारें पंजाब, कर्नाटक और तेलंगाना आदि में हैं) के साथ सरकार का टकराव और तीखा होना तय है. बहरहाल, सरकार की इस तेज होती कवायद ने साफ कर दिया है कि वह चुनावी सुधार के इस सबसे बड़े ‘ब्रह्मास्त्र’ को जल्द से जल्द इस्तेमाल करने की पूरी तैयारी कर चुकी है.



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