देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राज्य के मदरसों के पाठ्यक्रम में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को शामिल करने की घोषणा की है. उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के इस बड़े फैसले के तहत, राज्य के लगभग 450 रजिस्टर्ड मदरसों में पढ़ने वाले छात्र अब भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम की कहानी को अपने पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में पढ़ेंगे. इस पहल का उद्देश्य युवा पीढ़ी में देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देना और उन्हें भारतीय सेना के बलिदान और वीरता से परिचित कराना है.
उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि ऑपरेशन सिंदूर का एक विशेष चैप्टर इंटरमीडिएट स्तर (कक्षा 11 और 12) तक के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा.
यह कदम न केवल छात्रों को आधुनिक इतिहास और राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में जागरूक करेगा, बल्कि उन्हें देश के प्रति गर्व और सम्मान की भावना से भी जोड़ेगा. मुफ्ती कासमी ने कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे छात्र न केवल धार्मिक और पारंपरिक शिक्षा प्राप्त करें, बल्कि देश की वीर गाथाओं से भी प्रेरणा लें. ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की बहादुरी का प्रतीक है, और इसे पाठ्यक्रम में शामिल करना हमारे लिए गर्व की बात है.”
भारत का ऑपरेशन सिंदूर
ऑपरेशन सिंदूर, जो हाल ही में भारतीय सेना द्वारा सफलतापूर्वक संचालित किया गया, पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और लॉन्च पैड्स को निशाना बनाने का एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान था. इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने अपनी सामरिक कुशलता और तकनीकी श्रेष्ठता का प्रदर्शन किया, जिसमें स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम ने भी अहम भूमिका निभाई. इस अभियान ने न केवल भारत की सैन्य ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया, बल्कि राष्ट्रीय एकता और आत्मनिर्भरता के संदेश को भी मजबूत किया.
मदरसों में पहले से ही NCERT सिलेबस लागू
उत्तराखंड में वर्तमान में 451 रजिस्टर्ड मदरसे हैं, जिनमें लगभग 50,000 से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं. इन मदरसों में पहले से ही राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) का पाठ्यक्रम लागू किया गया है, जिसमें विज्ञान, गणित, और सामाजिक अध्ययन जैसे आधुनिक विषय शामिल हैं. अब ऑपरेशन सिंदूर को पाठ्यक्रम में शामिल करने से छात्रों को भारतीय सेना के इतिहास और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति गहरी समझ विकसित करने में मदद मिलेगी.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम उत्तराखंड के युवाओं में देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और मजबूत करेगा. उन्होंने कहा, “हमारी सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से जो वीरता दिखाई, वह हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है. इसे मदरसों के पाठ्यक्रम में शामिल करना हमारी नई पीढ़ी को देश के लिए समर्पण का पाठ पढ़ाएगा.”
वक्फ बोर्ड का समर्थन और नई पहलें
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने भी इस पहल का समर्थन किया और बताया कि देहरादून में जल्द ही एक अत्याधुनिक मदरसा शुरू होने जा रहा है, जिसमें संस्कृत सहित अन्य आधुनिक विषयों को भी पढ़ाया जाएगा. यह कदम मदरसा शिक्षा को और समावेशी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
यह निर्णय न केवल शैक्षिक सुधारों की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह सामाजिक एकता और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देने का भी एक प्रयास है.
-भारत एक्सप्रेस
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