Origin of Roti: भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में रोटी हर दिन की थाली का हिस्सा है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोटी की शुरुआत कहां से हुई थी? किसने सबसे पहले इसे बनाया? चलिए जानते हैं रोटी की दिलचस्प कहानी.
रोटी का इतिहास
रोटी का इतिहास हजारों साल पुराना है और इसकी शुरुआत प्राचीन मिस्र से हुई थी. हाल ही में मिस्र में दुनिया का सबसे बड़ा म्यूजियम ग्रैंड इजिप्शियन म्यूजियम खुला है. यह म्यूजियम गीजा के पिरामिड से सिर्फ एक मील दूर है. इस म्यूजियम ने फिर से प्राचीन मिस्र की सभ्यता को सामने लाया है और बताया है कि मिस्रवासियों का योगदान सिर्फ कला और वास्तुकला तक सीमित नहीं था बल्कि खाने-पीने की चीजों में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई.
पहली रोटी किसने बनाई?
फूड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट की रिसर्चर डॉ. मनाल इज्जेदीन ने बताया कि प्राचीन मिस्रवासी दुनिया के पहले लोग थे जिन्होंने रोटी बनाई थी. उन्होंने ही रोटी बनाने का तरीका दुनिया को सिखाया था. आज यह रोटी अलग-अलग रूपों में पूरी दुनिया में खाई जाती है.
शहद निकालने वाले पहले लोग
इतना ही नहीं मिस्रवासी मधुमक्खियों से शहद निकालने वाले पहले लोग भी थे. उन्होंने शहद के छत्ते और केक बनाए जो आज भी लोकप्रिय हैं. मसूर की दाल का सूप भी उन्हीं की देन है जिसे पिरामिड बनाने वाले कारिगरों को प्रोटीन देने के लिए दिया जाता था.
प्राचीन मिस्र का स्वस्थ आहार
उनका आहार सब्जियों और मछली पर आधारित था जिससे उन्हें फुर्ती और अच्छा स्वास्थ्य मिलता था. वे तारो और लेट्यूस जैसी पत्तेदार सब्जियां खाते थे. उन्होंने सेब और अंगूर की खेती भी शुरू की और अंगूरों को सुखाकर किशमिश बनाई. भिंडी जैसे कई मिस्री व्यंजन आज भी फिरऔनी काल की याद दिलाते हैं.
तेल निकालने की तकनीक
तेल निकालने में भी मिस्रवासियों ने कमाल किया. उन्होंने अरंडी और जैतून का तेल निकाला, जिसे खाने और दवाईयों में इस्तेमाल किया जाता था.
रोटी भारतीय संस्कृति का हिस्सा
हालांकि भारत में रोटी सिर्फ एक भोजन नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और रोजमर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है. यहां चपाती का इतिहास भी हजारों साल पुराना है और यह धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी अहम रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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