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40 तारीखें, न वकील आया न सांसद! कोर्ट ने पूछा- ‘कहां हैं पप्पू यादव?’, फिर बेउर जेल भेजने का दिया आदेश

Pappu Yadav: पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात 31 साल पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें आज रविवार को पटना सिविल कोर्ट ने ज्यूडिशल कस्टडी में भेज दिया. शनिवार की देर रात उन्हें पटना के बेउर जेल ले जाया गया.

Pappu Yadav

Pappu Yadav: पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात 31 साल पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें आज रविवार को पटना सिविल कोर्ट ने ज्यूडिशल कस्टडी में भेज दिया. शनिवार की देर रात उन्हें पटना के बेउर जेल ले जाया गया, जहां उनकी एंट्री की गई, उसके बाद उन्हें इलाज के लिए पीएमसीएच भेज दिया गया था.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान इस केस को लेकर कई नई जानकारी सामने आई. मसलन इस केस में पप्पू यादव को कोर्ट में पेश होने के लिए 40 से अधिक तारीखें पड़ी, लेकिन ना तो पूर्णिया सांसद किसी भी तारीख पर कोर्ट पहुंचे और ना ही उनकी तरफ से कोई कोर्ट पहुंचा.

कोर्ट में क्या हुआ?

31 साल पुराने इस मामले में जज के सामने विरोधी पक्ष के वकील ने मामले को पेश किया. जिसपर कोर्ट ने पूछा कि पप्पू यादव कहां हैं?

कोर्ट के सवाल पर पप्पू यादव के वकील ने जवाब दिया कि वो बाहर एंबुलेंस में हैं. जिसपर कोर्ट ने कहा कि जैसी भी स्थिति हो, उन्हें कोर्ट लाया जाए. जिसके बाद पप्पू यादव को अंदर लाया गया.

पूर्णिया सांसद के वकील ने कोर्ट में बचाव करते हुए कहा कि वो सरेंडर करने वाले थे, लेकिन उससे पहले पुलिस को उनकी भनक लग गई और पुलिस ने उन्हें देर रात गिरफ्तार कर लिया. आखिर वो कहां जाएंगे. उनकी तबीयत खराब है, बेल दे दीजिये.

पप्पू यादव के वकील की मांग का विरोधी पक्ष ने विरोध करते हुए कहा कि वो बिल्कुल फिट हैं. अभी वो डिस्चार्ज होकर आए हैं. इन्हें जेल भेज दिया जाए. ताकि इन्हें रिमांड पर लिया जा सके.

जिसके बाद पप्पू यादव को कोर्ट ने ज्यूडिशल कस्टडी में भेज दिया.

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल यह मामला साल 1995 का है, जब पप्पू यादव पहली बार सांसद बनने के बाद पटना पहुंचे थे. उस समय पप्पू यादव की पहचान एक बड़े बाहुबली के तौर पर होती थी. उनके और आनंद मोहन के बीच गैंगवार की खबर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में होती थीं.

पटना में उनके समर्थकों के दबाव के चलते गर्दनीबाग थाना इलाके के पुनाइचक इलाके में उन्हें एक फ्लैट किराये पर मिल गया. यह फ्लैट बिहारी लाल का था.

पप्पू यादव ने तब कहा था कि वो इस फ्लैट में अपने परिवार के साथ रहेंगे, लेकिन बाद में उन्होंने इस फ्लैट में अपना दफ्तर भी खोल लिया. आए दिन लोगों की भीड़ फ्लैट में आने लगी. जिससे मकान मालिक बिहारी लाल को परेशानी होने लगी.

उन्होंने सांसद से फ्लैट खाली करने को कहा, लेकिन सत्ता और ताकत के नशे में चूर पप्पू यादव ने बात नहीं मानी. उनके समर्थकों ने भी फ्लैट को खाली करने से मना कर दिया.

जिसके बाद मकान मालिक बिहारी लाल ने गर्दनीबाग थाने में पप्पू यादव के खिलाफ केस दर्ज करा दिया. यह मामला 18 अक्टूबर 1995 को कोर्ट चला गया. जिसके बाद से केस लंबित है. पप्पू यादव ने इस मामले में नियमित जमानत ले रखी थी.

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कोरोना काल से पहले तक पप्पू यादव इस मामले को लेकर कोर्ट में पेश होते रहे, लेकिन कोरोना के बाद उन्होंने कोर्ट जाना छोड़ दिया. इसी बीच 40 तारीखें पड़ी लेकिन ना तो पप्पू यादव और ना ही उनकी तरफ से कोई वकील इस मामले को लेकर कोर्ट में पेश हुआ. जिसके बाद 8 अक्टूबर 2025 को कोर्ट ने नॉन बेलेबल वारंट जारी कर दिया.

लगभग 4 महीने तक पूर्णिया सांसद पुलिस की नजर में फरार रहे. उसके बाद अब उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

-भारत एक्सप्रेस



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