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नीतीश सरकार ध्यान दें..! बिहार में किसानों क्यों कर दिया महाजाम?

पैदावार बम्पर लेकिन खरीद का कोटा कम! बिहार के किसान अपनी ही फसल के साथ सड़कों पर बैठने को मजबूर हैं. फरवरी में समय सीमा खत्म होने वाली है और हजारों क्विंटल धान दरवाजों पर सड़ रहा है. पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट.

Bihar farmers protest 2026

Bihar News/Dharmendra Anand/ Bihta Patna: बिहार के अन्नदाता आज बेबस हैं. जिस धान को पसीने से सींचकर किसानों ने तैयार किया, आज वही फसल उनके गले की फांस बन गई है. आलम यह है कि फरवरी का महीना सिर पर है, धान की खरीद का समय खत्म होने को है, लेकिन किसानों का अनाज सरकारी गोदामों के बजाय उनके दरवाजों पर पड़ा-पड़ा सड़ रहा है. सरकार की लचर व्यवस्था और सुस्त रवैये से तंग आकर आखिरकार पटना जिले के किसानों के सब्र का बांध टूट गया.

सड़कों पर उतरे ट्रैक्टर लिए किसान

पटना के बिक्रम इलाके में स्थित शहीद चौक पर मंगलवार को एक अलग ही नजारा देखने को मिला. यहाँ विरोध की कोई मामूली आवाज नहीं, बल्कि एक महासंग्राम छिड़ा था. हजारों की संख्या में किसान अपने धान से लदे ट्रैक्टर और ट्रालियां लेकर सड़क पर उतर आए.

देखते ही देखते पूरा शहीद चौक चक्का जाम की चपेट में आ गया. सड़कों पर कतारबद्ध खड़ी ट्रालियां किसानों की उस बेबसी की गवाही दे रही थीं, जिसे सुनने वाला कोई नहीं है.

लक्ष्य घटाने पर भड़का गुस्सा

इस महाधरना में सिर्फ बिक्रम ही नहीं, बल्कि बाढ़, मसौढ़ी, मोकामा और आसपास के तमाम प्रखंडों से किसान और सहकारी समितियों के अध्यक्ष शामिल हुए. किसानों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह है सरकार द्वारा धान खरीद के लक्ष्य को घटा देना. विडंबना देखिए, इस साल बिहार में धान की पैदावार जबरदस्त हुई है, लेकिन सरकार ने किसानों का साथ देने के बजाय खरीद की सीमा कम कर दी है.

किसानों का कहना है कि जब पैदावार ज्यादा हुई है, तो सरकार को कोटा बढ़ाना चाहिए था, लेकिन यहाँ तो गंगा उल्टी बह रही है. इसी का फायदा उठाकर बिचौलिए सक्रिय हो गए हैं और मजबूर किसानों से औने-पौने दाम पर फसल लूट रहे हैं.

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तीन दिनों का अल्टीमेटम

प्रदर्शनकारी किसानों ने दोटूक शब्दों में सरकार को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर अगले तीन दिनों के भीतर धान की खरीद शुरू नहीं हुई और लक्ष्य बढ़ाने पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो यह शांतिपूर्ण धरना उग्र आंदोलन का रूप ले लेगा. किसान संगठनों का कहना है कि वे अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं.

हमारे संवाददाता धर्मेंद्र आनंद ने जमीन पर उतरकर इन किसानों का दर्द समझा. बातचीत के दौरान किसानों की आंखों में गुस्सा और लाचारी साफ दिखी. एक किसान ने भारी मन से कहा, “खेत में फसल बर्बाद हो रही है और दरवाजे पर पड़ा अनाज कर्ज की याद दिला रहा है, सरकार आखिर चाहती क्या है?”

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-भारत एक्सप्रेस



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