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12 साल बाद मिला इंसाफ! शामली में घर में घुसकर भाई की हत्या करने वाले दोषियों को फांसी की सजा

शामली के बहुचर्चित पवन कुमार हत्याकांड में 12 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है.

रिपोर्ट- नीरज त्यागी


उत्तर प्रदेश के शामली जिले के बहुचर्चित पवन कुमार हत्याकांड में करीब 12 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. घर में घुसकर गोली मारकर हत्या करने के इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है. अदालत ने चारों पर कुल 1 लाख 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

मामला 14 जुलाई 2014 का है. शामली के भभीसा गांव में उस दिन हथियारों से लैस कुछ लोग अशोक के घर पहुंचे थे. आरोप था कि हमलावर अशोक को निशाना बनाने आए थे. जान बचाने के लिए अशोक घर के एक कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया.

हमलावरों ने इसके बाद उसके बड़े भाई पवन कुमार पर गोलियां चला दीं. गोली लगने से पवन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अशोक इस हमले में बच गया और घायल हुआ था. घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया था.

पुरानी रंजिश में हत्या का आरोप

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, इस वारदात के पीछे पुरानी रंजिश थी. पवन के परिवार और कुख्यात बदमाश विपुल उर्फ खूनी की मां के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई थी. इसी विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी बढ़ गई. आरोप है कि इसी रंजिश के चलते हथियारबंद लोग पवन के घर पहुंचे और उसे मौत के घाट उतार दिया.

मामला अदालत पहुंचने के बाद लंबे समय तक इसकी सुनवाई चली. अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए कुल नौ गवाह पेश किए. इनमें घटना के वादी और मृतक के भाई अशोक की गवाही महत्वपूर्ण रही. इसके अलावा पवन की पत्नी सोनबीरी की गवाही को भी अभियोजन पक्ष ने अहम आधार बनाया.

चार दोषियों को मिली फांसी

सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने रामवीर, राजीव उर्फ छोटू, राहुल उर्फ घोसी और हरेंद्र को दोषी माना. अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए चारों को फांसी की सजा सुनाई. इसके साथ ही चारों दोषियों पर कुल 1.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया.

सरकारी अधिवक्ता कुलदीप सिंह ने बताया कि अदालत ने इस वारदात को गंभीर से गंभीरतम श्रेणी का अपराध माना है. उनके मुताबिक, अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के जरिए अपना पक्ष रखा, जिसके आधार पर यह फैसला आया.

मुख्य आरोपी की पहले ही हो चुकी है मौत

इस मामले में नामजद मुख्य आरोपी विपुल उर्फ खूनी की पुलिस मुठभेड़ में पहले ही मौत हो चुकी है. वहीं, एक अन्य आरोपी अमित की पत्रावली सुनवाई के दौरान अलग कर दी गई थी. इस वजह से मौजूदा फैसले में चार आरोपियों के खिलाफ अदालत ने सजा सुनाई है.

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-भारत एक्सप्रेस



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