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Periods Leave: क्या भारत में महिलाओं को मिलती है पीरियड्स में छुट्टी? जानें इस बात में है कितनी सच्चाई

मेडिकल साइंस की मानें तो पीरियड्स शुरू होने से पहले और इसके दौरान महिलाओं में 200 तरह के बदलाव होते हैं.

Periods Leave

सांकेतिक फोटो-सोशल मीडिया

Periods Leave: इन दिनों पीरियड्स लीव (माहवारी के दिन) को लेकर चर्चा जोरों पर चल रही है. भारत में भी कई सालों से इस पर बहस छिड़ी हुई है. जहां बड़ी संख्या में महिलाओं की मांग है कि पीरियड्स के दौरान उन्हें छुट्टी मिलनी चाहिए. क्योंकि इस दौरान पेडू में दर्द सहित कई समस्याएं होती हैं तो वहीं दूसरी तरफ महिलाओं का एक बड़ा वर्ग इससे सहमत नहीं है.

हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड्स लीव पर केंद्र सरकार को एक मॉडल पॉलिसी बनाने का निर्देश दिया है. इसी बीच ये भी सवाल सामने आ रहे हैं कि क्या भारत में ऐसा कोई राज्य है जहां पीरियड्स लीव दी जाती है? तो आइए जानते हैं क्या सही है?

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पीरियड्स लीव क्यों?

लड़कियों व महिलाओं को महीने में होने वाले पीरियड्स के दौरान सिर व पेडू में दर्द, चिड़चिड़ापन, थकान, कब्ज, पैरों में सूजन जैसे तमाम समस्याएं होती हैं. अगर मेडिकल साइंस की मानें तो पीरियड शुरू होने से पहले और इसके दौरान महिलाओं में 200 तरह के बदलाव होते हैं. ये बदलाव सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक भी होते हैं. अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सियाओबान हार्लो ने एक बयान में कहा था कि पीरियड्स के दौरान 15% से 25% महिलाओं को जबरदस्त दर्द होता है. तो वहीं पीरियड्स लीव को लेकर छिड़ी बहस में पुरुषों के साथ ही बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं भी हैं जो कि इसका विरोध कर रही हैं.

मामला सुप्रीम कोर्ट में

मालूम हो कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है और कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक मॉडल पॉलिसी बनाने का निर्देश दिया है. हालांकि चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा है कि पीरियड लीव नीति से जुड़ा मुद्दा है. इसी के साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा है कि इस पर अदालत में विचार नहीं किया जा सकता है. इसको लेकर कोर्ट का कहना है कि अगर इस पर कोर्ट कोई फैसला सुनाती है तो महिलाओं को इससे नुकसान हो सकता है, क्योंकि फिर लोग महिलाओं को नौकरी देने से बच सकते हैं.

पीरियड्स लीव देने में भारत का ये राज्य भी आगे

भले ही बिहार को लोग तमाम मामलो में पिछड़ा राज्य मानते हों लेकिन लेकिन बिहार पहला राज्य था, जिसने अपनी महिला कर्मचारियों को पीरियड लीव का हक दिया था. बिहार में 1992 से कानून है कि राज्य सरकार की महिला कर्मचारी हर महीने दो दिन की पीरियड लीव ले सकती हैं. हालांकि ये छुट्टी 45 साल की उम्र तक ही दिए जाने की घोषणा की गई थी. तो वहीं 2020 में जोमैटो कंपनी ने पीरियड लीव देने की घोषणा की थी.

जोमैटो हर साल 10 दिन की पेड लीव देता है. इसके अलावा भी कई कई स्टार्टअप ऐसी छुट्टियां देनी शुरू कर दी थी. हालांकि दुनिया के कई देश हैं जो महिलाओं को पीरियड्स लीव देते हैं. फिलहाल इसको लेकर भारत में कोई केंद्रीय कानून नहीं है. हालांकि 2023 में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सरकारी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वालीं छात्राओं के लिए पीरियड लीव की घोषणा की थी. इसके बाद छात्राओं के लिए 75% की बजाय 73% अटेंडेंस अनिवार्य कर दिया गया था.

-भारत एक्सप्रेस

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