पीएम मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित किया. उन्होंने जोर देकर कहा कि जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है, तो पूरा सिस्टम अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनता है.
नारी शक्ति पर 2029 का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 2023 में जब ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लाया गया था, तो इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया था. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता इस कानून को 2029 तक हर हाल में लागू करने की है. उन्होंने विश्वास जताया कि संवाद और सहयोग के जरिए संसद इस दिशा में नई ऊंचाइयों को छुएगी.
महिलाओं का बढ़ता दबदबा
पीएम मोदी ने देश के सर्वोच्च पदों पर महिलाओं की उपस्थिति पर गर्व जताया. उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रपति से लेकर वित्त मंत्री तक, महिलाएं अहम जिम्मेदारियां निभा रही हैं.
- पंचायत स्तर पर भागीदारी: वर्तमान में 14 लाख से अधिक महिलाएं स्थानीय निकायों में सक्रिय हैं.
- 50% हिस्सेदारी: देश के लगभग 21 राज्यों में पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है.
जनधन और मुद्रा योजना का जादू
2014 से पहले की तुलना करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि करोड़ों महिलाओं ने कभी बैंक का दरवाजा नहीं देखा था. जनधन योजना के जरिए महिलाओं के 32 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खोले गए, जिससे उनकी आर्थिक भागीदारी सुनिश्चित हुई है. साथ ही, उन्होंने बताया कि मुद्रा योजना के तहत दिए गए कुल लोन में से 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा महिलाओं के नाम है, जो उनके उद्यमी बनने के सपने को सच कर रहा है.
करियर में ऐतिहासिक सुधार
- भारत के ‘स्टार्टअप रिवोल्यूशन’ में भी महिलाएं पीछे नहीं हैं.
- स्टार्टअप्स: 42 प्रतिशत से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला डायरेक्टर है.
- मैटरनिटी लीव: महिलाओं के करियर में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए सरकार ने मैटरनिटी लीव को बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दिया है, जो कई विकसित देशों से भी अधिक है.
ड्रोन दीदी और ‘वोकल फॉर लोकल’
स्किल इंडिया और ‘ड्रोन दीदी’ जैसी पहलों के माध्यम से महिलाएं अब कृषि जैसे क्षेत्रों में तकनीक का नेतृत्व कर रही हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश की महिलाएं ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान की असली ब्रांड एंबेसडर हैं.
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घर की मालकिन बनीं महिलाएं
सामाजिक सोच को बदलने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले घरों को महिलाओं के नाम पर रजिस्टर करने की पहल की है. इससे न केवल उनकी सामाजिक गरिमा बढ़ी है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी सुरक्षित हुई हैं.
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